मुंबई के पुस्तक विक्रेताओं को ग्राहकों का इंतज़ार, पहले की तरह कामकाज नहीं

मुम्बई(Mumbai) के प्रसिद्ध फ़ाउंटेन इलाके में मौजूद पुस्तक विक्रेताओं पर कोरोना (Coronavirus) और लॉकडाउन (Lockdown) का बड़ा असर पड़ा है.

मुंबई के पुस्तक विक्रेताओं को ग्राहकों का इंतज़ार, पहले की तरह कामकाज नहीं

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई:

मुम्बई(Mumbai) के प्रसिद्ध फ़ाउंटेन इलाके में मौजूद पुस्तक विक्रेताओं पर कोरोना (Coronavirus) और लॉकडाउन (Lockdown) का बड़ा असर पड़ा है. उनके यहां पहले की तरह लोग किताबें ख़रीदने नहीं आ रहे हैं, मानसून में हुई तेज़ बारिश का असर भी इनके व्यवसाय पर पड़ा है.

शनिवार और रविवार को खरीदारों से भरे रहने वाले फाउंटेन बुक स्टॉल का यह हाल है कि अब गिने चुने लोग ही यहां नज़र आ रहे हैं. गेटवे ऑफ इंडिया से कुछ दूरी पर मौजूद इन दुकानों पर आमतौर पर देश, विदेश से मुम्बई घूमने वाले पर्यटक आया करते थे, पर अब हालत यह है कि पहले की तुलना में केवल 20 फीसदी कारोबार बचा है. रोज़गार में कटौती करनी पड़ी है.

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पुस्तक विक्रेता राजेन्द्र चंदेल ने बताया, 'बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, पहले हमारे पास दो तीन लोग काम करते थे, अब एक ही आदमी है. अब हम दो लोग ही काम करते हैं, पहले तीन लोग थे, उनको सैलरी कहां से देंगे. जब सेल नहीं होगा तो सैलरी कहां से देंगे.

लॉकडाउन के समय बिहार जाने वाले शिवनारायण मंडल 25 साल से इस व्यवसाय से जुड़े हैं. पांच दिन पहले ही वो गांव से लौटे है. अब हालत ये है कि बीच में तो एक दिन एक किताब भी नहीं बिकी, इनकी बोहनी भी नहीं हो सकी. शिवनारायण मंडल ने बताया,'' ऐसा कभी नहीं देखा, लॉकडाउन के कारण दुकान बंद था, हमलोग गांव चले गए थे, 19 को लौटे हैं. उसके बाद जब दुकान खोले तो दो दिन बोहनी हुआ, परसो खोले तो बोहनी भी नहीं हुआ.फिर भी कल और आज हुआ. पब्लिक का कम आने का कारण यह हुआ.'

सिद्धार्थ कॉलेज के पास वाली इन दुकानों में छात्रों का भी आना जाना लगा रहता था. पर इस साल पढ़ाई ऑनलाइन की जा रही है. ऊपर से मॉनसून में हुए जलजमाव के कारण कई किताबें खराब हो गईं. आमदनी न होने से बचत भी ख़त्म हो रही है.नीलेश त्रिवेदी को अपनी बेटी की फीस भरने के लिए म्यूच्यूअल फण्ड के पैसों को निकालना पड़ा.

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नीलेश त्रिवेदी ने बताया, ''सबलोगों का अगर आप मिला दो तो दो तीन हज़ार किताबों का नुकसान हुआ है. बहुत दिनों से दुकानें बंद थी तो दीमक के कारण दूसरे किताबों पर इसका असर पड़ा. मैंने मेरी बेटी का फीस भरने के लिए दो साल से जो म्यूच्यूअल फण्ड में पैसे जमा कर रखा था, मैंने वो तोड़कर फीस भरा.'

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