शरद पवार का BJP पर तंज, 'जब जनता ने इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे मजबूत नेताओं...'

Sharad Pawar: एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा कि किसी भी राजनेता को जनता के बीच में जाकर यह नहीं कहना चाहिए कि मैं ही वापस आऊंगा.

शरद पवार का BJP पर तंज, 'जब जनता ने इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे मजबूत नेताओं...'

Sharad Pawar: शरद पवार ने 'सामना' को इंटरव्यू दिया. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • शरद पवार ने 'सामना' को दिया इंटरव्यू
  • एनसीपी के प्रमुख हैं शरद पवार
  • महाराष्ट्र में एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस की सरकार
मुंबई:

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने शिवसेना (Shiv Sena) के मुखपत्र 'सामना' (Saamana) को इंटरव्यू दिया है. इंटरव्यू में उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की. एनसीपी सुप्रीमो ने कहा, 'अगर आप लोकसभा के चुनाव में देखें तो महाराष्ट्र के वोटरों ने केंद्र में जो सरकार है उनके ही पक्ष में वोट दिया और जब राज्य का प्रश्न आया तब महाराष्ट्र में एक अलग चित्र देखने मिला और केवल महाराष्ट्र ही नहीं मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ में भी देखा गया कि जो बीजेपी सरकार है, लोगों ने उसके खिलाफ वोट किया. लोगों ने लोकसभा में अलग और विधानसभा में अलग तरह से वोट दिया.'

उन्होंने आगे कहा, 'पिछले 5 साल में महाराष्ट्र में भी अगर देखा जाए तो लोग सरकार से खुश नहीं थे. जो शिवसेना का वोटर है वह भी राज्य के बीजेपी सरकार से खुश नहीं था. पिछले 5 साल में बीजेपी ने शिवसेना को किस तरह से रोका जाए, उसके लिए काम किया और इसके कारण शिवसेना के कार्यकर्ता भी निराश थे. बीजेपी ने शिवसेना को किनारा करने की कोशिश की और एक संदेश देने की कोशिश की कि अब जो बीजेपी करेगी वही सही है और बीजेपी ही सबसे बड़ी पार्टी है, यह बात लोगों को अच्छी नहीं लगी.'

शरद पवार ने आगे कहा, 'किसी भी राजनेता को जनता के बीच में जाकर यह नहीं कहना चाहिए कि मैं ही वापस आऊंगा और महाराष्ट्र के उस समय के मुख्यमंत्री बार-बार यही कह रहे थे कि मैं वापस आऊंगा, मैं वापस आऊंगा और यह बात लोगों को अच्छी नहीं लगी.'

उन्होंने आगे कहा, 'किसी भी नेता को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह हमेशा के लिए ही सत्ता में रहेगा. इस देश के वोटरों ने इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे मजबूत नेता जिसके साथ पूरा देश खड़ा रहता था, उन्हें भी गिरा दिया. इसलिए इस तरह की गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए.'

एनसीपी सुप्रीमो ने कहा, 'बीजेपी जो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और बीजेपी को जो 105 सीटें मिली थीं, उसके लिए शिवसेना भी जिम्मेदार है और यह मेरा स्पष्ट मानना है कि अगर बीजेपी को मिले शिवसेना के वोट हटा दिए जाएं तो हर बार की तरह बीजेपी को 50 60 सीट ही मिलती थी. इसलिए जो बार-बार 105-105 कह रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि जिस दूसरी पार्टी की वजह से उन्हें 105 सीटें आईं, उन्होंने उनके साथ ही धोखा करने की कोशिश की.'

उन्होंने आगे कहा, 'मैं जिन बालासाहेब ठाकरे को जानता हूं, उनकी वजह से मुझे पता है कि जो बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा थी और उनके जो काम करने का तरीका था, वह बीजेपी से बिल्कुल मेल नहीं खाता है. बालासाहेब ठाकरे की जो भूमिका थी और जिस तरह से बीजेपी काम करती है उस में जमीन-आसमान का फर्क है. बालासाहेब ठाकरे ने कुछ व्यक्तियों का सम्मान किया था, जिनमें अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और प्रमोद महाजन शामिल हैं और उनके सम्मान की वजह से वह साथ में आए थे और राज्य में भी सरकार बनाई थी.'

पवार ने कहा, 'कांग्रेस और शिवसेना में हमेशा से अनबन रही है, यह मैं नहीं मानता हूं और पहले भी यह सिद्ध हो चुका है की राष्ट्रीय मुद्दे पर अपने भविष्य को ना सोचते हुए शिवसेना ने कांग्रेस का समर्थन किया था. जिस समय इंदिरा गांधी के खिलाफ पूरा देश खड़ा था, उस समय देश में अनुशासन लाने के लिए बालासाहेब ठाकरे इंदिरा गांधी के साथ खड़े नजर आए थे और यह सुनकर हम सभी को आश्चर्य हुआ था कि बालासाहेब ठाकरे ने चुनाव में अपने उम्मीदवार भी खड़े नहीं किए थे. क्या कोई राजनीतिक पार्टी ऐसा करेगी, यह कोई नहीं सोच सकता. पहले भी शिवसेना और कांग्रेस के बीच में ज्यादा मतभेद नहीं थे और अब उसी रास्ते पर उद्धव ठाकरे चलते हुए नजर आ रहे हैं.'

उन्होंने आगे कहा, 'मेरे और शिवसेना के बीच में भी कुछ मुद्दों पर जरूर मतभेद थे, पर इसका यह मतलब नहीं था कि हम एक दूसरे से बात भी नहीं करते थे. अभी के नेतृत्व से ज्यादा उस समय में शिवसेना के नेताओं से और बालासाहेब ठाकरे से बात किया करते थे. बालासाहेब ठाकरे किसी व्यक्ति के लिए ऐसे छुपकर मदद नहीं करते थे. वह अगर दूसरी पार्टी का भी हो तो वह खुलकर मदद करते थे. भविष्य के बारे में ना सोचते हुए भी मदद करते थे. अपने घर की ही बात बताता हूं, सुप्रिया सुले के पहली बार चुनाव लड़ने के समय बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना से कोई उम्मीदवार ही खड़ा नहीं किया था और यह केवल बालासाहेब ठाकरे ही कर सकते थे.'

उन्होंने आगे कहा, 'महाराष्ट्र में जो तीन पार्टियां साथ में आई हैं, उसका फायदा महाराष्ट्र की जनता को मिलता हुआ नजर आ रहा है. ऐसा मेरा मानना है पर दुर्भाग्य यह है कि पिछले कुछ समय से कोरोना के कारण बाकी चीजें रुक गई हैं और पूरा फोकस इसी पर है. अगर तीनों पार्टियां साथ नहीं होतीं तो कोरोनावायरस पर कंट्रोल नहीं पाया जा सकता था. आप ही विचार करिए तीन अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टी एक साथ आ रही हैं और मुख्यमंत्री के साथ खड़ी हैं.' 

शरद पवार ने आगे कहा, 'मैं ना ही सरकार का प्रिंसिपल हूं और ना ही रिमोट कंट्रोल. रिमोट कंट्रोल से सरकार रूस जैसे देश में चलती है, जहां पर अब पुतिन 2036 तक राष्ट्रपति रहेंगे. इसका मतलब वहां पर जो लोकशाही है, उसे एक तरफ कर दिया गया है और केवल एक ही व्यक्ति के पास सत्ता है. हमारी सरकार लोकतंत्र की सरकार है और यह सरकार रिमोट कंट्रोल पर कभी नहीं चल सकती.'

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