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पीएम मोदी ने 3600 करोड़ रु की लागत से बनने वाले शिवाजी स्मारक का शिलान्यास किया

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पीएम मोदी ने 3600 करोड़ रु की लागत से बनने वाले शिवाजी स्मारक का शिलान्यास किया

पीएम ने अरब सागर में भव्य स्मारक के निर्माण की सांकेतिक शुरुआत करते हुए विशिष्ट स्थल पर जलपूजन किया

खास बातें

  1. 192 मीटर लंबे इस स्मारक की लागत क़रीब 3,600 करोड़ रुपये आंकी गई है.
  2. ये स्मारक भारत का ही नहीं दुनिया का सबसे लंबा स्मारक होगा.
  3. नरीमन पॉइंट इलाके से आगे अरब सागर में 3 किलोमीटर अंदर बनेगा स्मारक
मुंबई:

मुंबई में अरब सागर में 3600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक की नींव रख दी गई. भूमि पूजन समारोह में कई केन्द्रीय मंत्रियों के अलावा शिवाजी के वंशजों को भी बुलाया गया. मराठा समाज के मूक मोर्चों को मिल रहे विशाल जनसर्थन को देखते हुए इसे मराठा समाज को मनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने होवरक्राफ्ट के जरिए समुद्र में जाकर छत्रपति शिवाजी महाराज के मेमोरियल के लिए जलपूजन किया. ये स्मारक राजभवन से 1.5 किलोमीटर दूर बनाया जाएगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुनिया के सबसे ऊंचे स्मारक को बनाने के लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया. शिव स्मारक की मुख्य विशेषताओं में मराठा शासक की 192 मीटर ऊंची प्रतिमा होगी. इस स्मारक को अरब सागर में 32 एकड़ चट्टान पर बनाया जा रहा है. फडणवीस ने कहा कि इसको देखने एक बार में 10 हजार लोग आ सकते हैं. इस स्मारक में थिएटर, लाइब्रेरी, फूड कोर्ट भी होगा. शिवाजी की मूर्ति को डिजाइन करने की जिम्मेदारी मशहूर शिल्पकार और पद्भभूषण से सम्मानित कलाकार राम सुतार को सौंपा गई है.

इस मौके पर शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं दिल्ली में पुरातत्व विभाग से एक ही गुज़ारिश करूंगा कि शिवाजी महाराज के सारे किलों का रखरखाव करें. बाद में प्रधानमंत्री ने कहा, "छत्रपति शिवाजी महाराज ने जो किले बनाए, हम उनका सही रखरखाव करें और दुनियाभर को उस बारे में बताएं. यूनिवर्सिटीज को बताएं कि यहां एडवेंचर टूरिज्म कराएं. क्यों न किलों के टूरिज्म शुरू कराएं? आज मेरे लिए अत्यंत आनंद का पर्व है. मैं महाराष्ट्र की जनता का आभारी हूं कि इस स्मारक में भूमि पूजन का मुझे सौभाग्य मिला है. जो संकल्पना महाराष्ट्र और फडणवीस सरकार ने की है, यह पूरी होकर रहेगी, ऐसी मेरी आशा है.''


पीएम ने कहा, ''ताजमहल देखकर लगता है कि जाना चाहिए. हर युग में आइकॉनिक चीजों का निर्माण हुआ है. वह उस देश की पहचान बना हुआ है. दुर्भाग्य है कि हम ताजमहल के बाहर नहीं निकल पाए. इस देश के हर कोने में विश्व को आकर्षित करने के अनेक स्थान हैं. अगर भारत का विश्व के सामने सही तरीके से प्रस्तुतीकरण हो तो भारत में दुनिया को आकर्षित करने की ताकत है. दुनिया में तेजी से टूरिज्म बढ़ रहा है.''

छत्रपति शिवाजी के संदर्भ में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीजेपी ने 2014 के चुनाव के लिए मुझे जिम्मेदारी दी तो मैं पहले रायगढ़ के किले पर आया. उनकी समाधि के सामने बैठा था. वे वीर, पराक्रमी महापुरुष थे, जिन्होंने सुशासन और प्रशासन का इतिहास में नया अध्याय लिखा था. ये उन्होंने अपनी योग्यता पर किया था.''

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शिवाजी स्मारक के उद्घाटन से पहले मुंबई में कई जगहों पर शिवसेना-बीजेपी के बीच पोस्टर वॉर भी दिखी. बीजेपी के पोस्टरों में उद्धव को जगह नहीं मिली तो वहीं शिवसेना के पोस्टरों में इसे बालासाहेब ठाकरे का सपना बताया गया. एमएमआरडीए मैदान में भी शिवसैनिकों और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाज़ी हुई. भीड़ से कुछ नारे मराठा आरक्षण के समर्थन में भी लगे.

वैसे कई पर्यावरणविदों का दावा है कि इस स्मारक से कोरल रीफ और मछलियों की कई प्रजातियों पर खतरा बढ़ेगा. समंदर का पर्यावरण भी इससे बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे मछुआरों की रोज़ी पर खतरा हो सकता है. (पढ़ें - क्या है विवाद)
 



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