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शिवसेना ने फिर साधा मोदी सरकार पर निशाना, कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में कमी के दावे पर उठाया सवाल

शिवसेना ने कहा कि आतंकवादी घाटी में युवाओं में भय उत्पन्न करने के लिए अब जवानों की हत्या कर रहे हैं.

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शिवसेना ने फिर साधा मोदी सरकार पर निशाना, कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में कमी के दावे पर उठाया सवाल
मुंबई: महाराष्‍ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. इस पर शिवसेना ने सरकार के उस दावे पर सवाल उठाया है जिसमें सरकार ने कहा था कि जम्मू कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में कमी आयी है. शिवसेना ने कहा कि आतंकवादी घाटी में युवाओं में भय उत्पन्न करने के लिए अब जवानों की हत्या कर रहे हैं. शिवसेना ने प्रांतीय सेना के जवान इरफान अहमद की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक ‘‘नयी तकनीक’’ है जिसका उद्देश्य कश्मीरी युवाओं के बीच भय उत्पन्न करना और उन्हें हतोत्साहित करना है. शिवसेना ने कहा कि जवानों की नृशंस हत्या एक पाकिस्तानी योजना है.

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की ओर इशारा करते हुए लिखा है, ‘‘यह सब पाकिस्तानियों के ‘मन की बात’ है. जो व्यक्ति प्रत्येक (महीने किसी) रविवार को अपनी ‘मन की बात’ करता है क्या उसे यह अहसास होगा?’’ इसमें लिखा है कि मुम्बई आतंकवादी हमले के मुख्य षड्यंत्रकर्ता हाफिज सईद की पाकिस्तान में रिहायी से सीमा से लगे राज्य में आतंकवाद की गतिविधियों को नयी संजीवनी मिल सकती है.

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संपादकीय में लिखा है, ‘‘सैनिक इरफान अहमद की शोपियां जिले में अपहरण करके हत्या की गई. आतंकवादी संगठन इस तकनीक का इस्तेमाल कश्मीरी युवाओं को हतोत्साहित करने और उनमें भय उत्पन्न करने के लिए कर रहे हैं.’’ इसमें लिखा है कि यह हत्या उन कश्मीरियों की हत्या करने के लिए आतंकवादी संगठनों द्वारा अपनायी गई तकनीक का हिस्सा है जो सेना या अर्द्धसैनिक बलों में शामिल हुए हैं.

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इसमें लिखा है, ‘‘इरफान अहमद की हत्या उन लोगों के दावों को चुनौती देती है जो कहते हैं कि कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियां कम हुई हैं. हाफिज सईद को नजरबंदी से रिहाई से आतंकवादी गतिविधियों को नयी संजीवनी मिल सकती है.’’ इसमें लिखा है, ‘‘सरकार दावा करती है कि (इस वर्ष) कश्मीर में 100 से 150 आतंकवादी मारे गए हैं और पथराव की घटनाएं कम हुई हैं. इसके साथ ही युवाओं की हत्या रुकी नहीं है. आतंकवादी कश्मीरी युवाओं के सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने को पचा नहीं पा रहे हैं.’’

(इनपुट भाषा से...)


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