मुंबई के डिब्बेवालों के लिए अनलॉक के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं

सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार मुंबई के डिब्बेवालों को अब शहर की लोकल ट्रेनों में सवार होने की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, डिब्बेवालों की परेशानियां अभी समाप्त नहीं हुई हैं.

मुंबई:

सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार मुंबई के डिब्बेवालों को अब शहर की लोकल ट्रेनों में सवार होने की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, डिब्बेवालों की परेशानियां अभी समाप्त नहीं हुई हैं. COVID-19 महामारी के मद्देनजर डिलीवरी का काम छह महीने से बंद पड़ा है. उनकी साइकिल जंग खा चुकी हैं. साथ ही साथ ग्राहक भी कम हुए हैं.

ऐसे ही एक डिब्बेवाले शांताराम गागुंडे ने बताया, "मैं पहले एक दिन में 25-26 टिफिन पहुंचाता था. अब यह संख्या लगभग पांच रह गई है. कमाई हो नहीं रही है और हमारी साइकिल भी जंग खा चुकी हैं." लॉकडाउन के बाद से, कई लोग घर से काम कर रहे हैं ऐसे में टिफिन सेवा की जरूरत कम ही लोगों को है.

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में आज से खुल जाएंगे रेस्टोरेंट, कई शर्तों के साथ दी गई इजाजत

हालांकि, जो शहर के इस 130 साल पुराने काम का हिस्सा हैं, उनके पास शायद ही अभी आय का कोई दूसरा जरिया है. एक डिब्बेवाले शंकर कदम ने बताया, "हमारे पास किराए के लिए पैसे भी नहीं है, हमारे खर्च बढ़ गए हैं. मुझे अपने बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा के लिए फोन खरीदने के लिए भी पैसे लेने पड़े."


पांच हजार डिब्बेवाले मुंबई में हर दिन 2 लाख टिफिन पहुंचाते हैं. हालांकि पिछले कुछ हफ्तों में, उन्होंने मात्र 400-500 की डिलीवरी की है. अपने नवीनतम मिशन स्टार्ट अगेन नोटिफिकेशन में, महाराष्ट्र सरकार ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों तक पहुंचने के लिए डिब्बेवालों को क्यूआर कोड खरीदने के लिए निर्देशित किया है. 

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com


नितिन सावंत पूछते हैं कि ट्रेनों में प्रवेश करने के लिए हमें क्यूआर कोड की आवश्यकता होगी. अब पहले से ही एक लाख से अधिक लोग क्यूआर कोड प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. वो डिब्बेवाले कैसे फॉर्म भरेंगे जो दूर रहते हैं?  इसके अलावा, सरकार ने छह महीने के अंतराल के बाद सोमवार से डिब्बावालों के साथ साथ रेस्तरां, बार और होटल खोलने को भी अनुमति दी है.