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...जब उद्धव ठाकरे और नारायण राणे ने स्वीकार किया एक-दूसरे का वजूद

सिंधुदुर्ग जिले की कुडाल तहसील में एक सरकारी कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे और नारायण राणे 12 साल बाद एक मंच पर आए

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...जब उद्धव ठाकरे और नारायण राणे ने स्वीकार किया एक-दूसरे का वजूद

सिंधु दुर्ग में कार्यक्रम में मंच पर अन्य अतिथियों के साथ मौजूद नारायण राणे और उद्धव ठाकरे.

खास बातें

  1. मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण के काम का भूमिपूजन हुआ
  2. उद्धव ने नारायण राणे को अपना पुराना सहयोगी बताया
  3. राणे ने उद्धव और उनकी पत्नी रश्मि का कोंकण में स्वागत किया
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक-दूसरे के धुरविरोधी के रूप में पहचाने जाने वाले शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेता नारायण राणे ने आखिरकार एक-दूसरे का वजूद स्वीकार किया. यह दोनों नेता 12 साल बाद एक मंच पर थे.

मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण के कामों का भूमिपूजन करने के लिए सिंधुदुर्ग जिले की कुडाल तहसील में सरकारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. यूं तो मंच पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी थे लेकिन सबकी नजरें टिकी थीं तो उद्धव और नारायण राणे की तरफ.

कार्यक्रम की शुरुआत के बाद उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि को मंच पर आमंत्रित किया गया. वे मंच पर उद्धव के बगल में बैठ गईं. इसके बाद केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते बैठे और फिर पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे को जगह मिली.

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मंच पर बैठे दोनों नेता 12 साल बाद किसी समारोह में एक-दूसरे के आसपास थे. नारायण राणे ने 2005 में शिवसेना से बगावत कर कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी. उसके बाद से उद्धव ठाकरे और नारायण राणे का द्वंद्व पूरे महाराष्ट्र ने देखा. बदलते वक्त के साथ राणे के तेवर बदले हैं. कांग्रेस से नाराज नारायण राणे की पहले शिवसेना और फिर बीजेपी में जाने की खबरें आजकल चर्चा में रही हैं.

ऐसे में राणे और उद्धव के बीच संवाद की शुरुआत शुक्रवार को हुई. उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में नारायण राणे को अपना पुराना सहयोगी बताया. जबकि नारायण राणे ने उद्धव और उनकी पत्नी रश्मि का कोंकण में स्वागत करने की बात कही.


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