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उद्धव ठाकरे का BJP पर हमला, बोले- 2014 के जनमत का रुझान जनता की गलती नहीं बल्कि जनता से ठगी थी

उद्धव में राजनीति में पैसे का जोर खासकर बीजेपी पर व्यंग करते हुए पूछा है कि यह पैसा कहां से आता है, यह पता चल गया तो अन्य राजनीतिक दलों को भी लाभ होगा. 

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उद्धव ठाकरे का BJP पर हमला, बोले- 2014 के जनमत का रुझान जनता की गलती नहीं बल्कि जनता से ठगी थी

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुखपत्र सामना को दिया इंटरव्‍यू

खास बातें

  1. बीजेपी पर राजनीति में पैसे का जोर को लेकर किया व्यंग
  2. कांग्रेस और राष्ट्रवादी आदि को तोड़कर BJP ने यहां भी राज स्थापित किया होता
  3. BJP से पूछना चाहिए कि यह पैसा कहां से आता है?
मुंबई:

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने अपने मुखपत्र सामना को दिए एक साक्षात्कार के दूसरे भाग में कहा है कि ‘2014 के जनमत का रुझान जनता की गलती नहीं बल्कि जनता से ठगी थी.’ उद्धव में राजनीति में पैसे का जोर खासकर बीजेपी पर व्यंग करते हुए पूछा है कि यह पैसा कहां से आता है, यह पता चल गया तो अन्य राजनीतिक दलों को भी लाभ होगा.  इस इंटरव्‍यू के पहले भाग में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि हम सरकार का हिस्सा हैं, लेकिन यदि कुछ गलत है तो हम निश्चित रूप से उस बारे में बात करेंगे. हम ‘भारतीय जनता’ के मित्र हैं, किसी ‘पार्टी’ के नहीं. 

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सवाल - 2014 के जनता का मत, जनता की भूल थी, आपको ऐसा लगता है क्या?
उद्धव ठाकरे का जवाब
- नहीं…मैं ऐसा नहीं कहता. जनता को फंसाया गया था इसलिए मैं कहता हूं कि समझो अगर उस समय हम सत्ता में सहभागी नहीं होते तो जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी आज राज्यों को जीतती जा रही है, किसी भी प्रकार से जैसे त्रिपुरा में कांग्रेस, तृणमूल को तोड़कर राज्य संभाला. वैसे ही महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रवादी आदि को तोड़कर अपना राज स्थापित किया होता तब हम सिर्फ चिल्लाते बैठते रास्ते पर. उसकी बजाय मैंने अपने लोगों को काम करने का अनुभव लेने दिया.  देश की राजनीति में ग्राम पंचायत का चुनाव रहा हो या लोकसभा का, पैसे का इतना प्रयोग हुआ है कि गत पचास सालों में कभी नहीं हुआ. हर चुनाव में पैसा और सत्ता का प्रयोग करके जीतना है. ऐसा चाणक्य ने कहा है क्या?  इस प्रकार की नई राजनीति नए चाणक्य ने शुरू की है या नहीं, लेकिन ऐसा चाणक्य ने कहा था क्या, मैंने तो नहीं पढ़ा. 


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सवाल - यह पैसा आता कहां से है? इसका उद्गम कहां है, इसकी गंगोत्री कहां है…?
उद्धव ठाकरे का जवाब-
यह हमें पता होता तो हमने नहीं कमाया होता? इसलिए जिसके पास यह पैसा है, उससे पूछना चाहिए कि यह पैसा कहां से आता है?

उद्धव ने बीजेपी को राजनीतिक डाकू भी कहा
उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह जो नई राजनीति भाजपा ने शुरू की है. यह राजनीति डाकू, इस शब्द के इर्द-गिर्द घूम रही है. मुझे लगता है. आप उस डाकू का या बाद में ऋषि बने उन वाल्मीकि का अपमान न करें. वे अलग थे. डाकू से वाल्मीकि बनने के लिए भी तपस्या करनी पड़ती है. वैसी तपस्या उन्होंने की थी इसलिए वे डाकू से वाल्मीकि बने सिर्फ कुर्सी पर बैठे और आशीर्वाद दिया तो डाकू से वाल्मीकि नहीं बनते. सेम में कदाचित मोड़ आ जाएगा, लेकिन आज के डाकुओं को वाल्मीकि बनाकर आप वाल्मीकि का अपमान न करें. वाल्मीकि ने दीर्घ तपस्या की इसलिए वे ऋषि बने. इसलिए डाकू से वाल्मीकि ऋषि. ऋषि यह शब्द महत्वपूर्ण है. ये कैसे ऋषि! यही साधु और मौकापरस्तों में अंतर है। साधु अलग और संधि साधु (मौकापरस्त) अलग. ये मौकापरस्त हैं. सेम में मोड़ आया उसी तरह आपने भी राजनीति में कई मोड़ लाए हैं. लाए, इसमें मैं क्या करूं? अब हमारी राजनीति ही एक ऐसे मोड़ पर है." 

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चचेरे भाई राज ठाकरे पर भी कसा तंज
उद्धव ने अपने इंटरव्‍यू के दूसरे हिस्से में चचेरे भाई राज ठाकरे के नाम लिए बिना तंज कसा है कि उनकी शिवसेना ही ओरिजिनल है. पिछली बार कभी तो मुझे एक साक्षात्कार में पूछा गया था कि आपकी पार्टी क्षेत्रीय है? कहा ऑफकोर्स है लेकिन यह असली है. यह पार्टी शिवसेनाप्रमुख ने दूसरी पार्टियों को फोड़कर स्थापित नहीं की है. वह शिवसेना के रूप में स्थापित हुई और शिवसेना के रूप में ही है तथा वह शिवसेना के रूप में ही रहेगी. उसने कभी भी अपना नाम, नेता अथवा निशान नहीं बदला और दूसरी पार्टी तोड़कर उन्होंने अपनी पार्टी नहीं बनाई. वास्तव में जो पार्टी मेरी पार्टी तोड़ने का प्रयास करके स्थापित हुई थी.

EVM पर उठाया सवाल

उद्धव ठाकरे ने चुनाव के लिए EVM का इस्तेमाल किये जाने पर भी सवाल उठाया है. एक सवाल के जवाब में उद्धव ने कहा है कि दूसरे की चाटुकारिता करने की बजाय वो बॉस बनना पसंद करेंगे. 
विरोध के बाउजूद सत्ता में बने रहने का तर्क देते हुए है उद्धव ने कहा है अब तक शिवसेना को अकेले राज्य करने का मौका नही मिला है, लेकिन जनता एक दिन उन्हें जरूर मौका देगी इसलिए उनके लोगों को सत्ता में काम करने का अनुभव लेने के का मौका दिया है. 

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उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र के भाग का फिलहाल दशावतार शुरू है. उद्योग क्षेत्र में हम पीछे जा रहे हैं.  नहीं, ऐसा नहीं है. आपने जो भाग्य बदलने की ताकत की बात कही. हां, अच्छे सत्ताधीश तो चाहिए, लेकिन पहले उसे एक अच्छा सत्ताधीश होना चाहिए. तब वो भाग्य बदलेगा न!
 
सवाल- तो यह सत्ताधीश का पद शिवसेना को कब मिलेगा?
उद्धव ठाकरे का जवाब- जनता ने तय कर लिया तब आएगा और मुझे विश्वास है कि अब तक जनता ने सभी पार्टियों का या अन्य दशावतारों का अनुभव लिया है. शिवसेना के अकेले सत्ता में रहने का अनुभव नहीं लिया है और इसीलिए मैंने कहा न कि मैंने अपने लोगों को सत्ता का अनुभव दिलवाया है. मतलब, जो संकट आए उसे आप मौका मानते हैं क्या?
 बिल्कुल


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