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32 साल बाद मिल मजदूरों के खिलाफ रेलवे कोर्ट ने भेजा गिरफ्तारी वारंट, जानें क्‍या है मामला

उज्जैन में वर्ष 1986 में मिल मजदूरों द्वारा किए रेल रोको आंदोलन में शामिल आंदोलनकारियों के खिलाफ 32 साल बाद रेलवे कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है.

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32 साल बाद मिल मजदूरों के खिलाफ रेलवे कोर्ट ने भेजा गिरफ्तारी वारंट, जानें क्‍या है मामला

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. मिल मजदूरों ने रेल रोको आंदोलन किया था
  2. 32 साल बाद रेलवे कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है.
  3. उनमें से अधिकतर बीजेपी के कार्यकर्ता हैं
नई दिल्ली: उज्जैन में वर्ष 1986 में मिल मजदूरों द्वारा किए रेल रोको आंदोलन में शामिल आंदोलनकारियों के खिलाफ 32 साल बाद रेलवे कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. रेलवे कोर्ट ने जिन लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है उनमें से अधिकतर बीजेपी के कार्यकर्ता हैं. 

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रेलवे ट्रैक जाम करने वाले मिल मजदूरों के खिलाफ 32 साल बाद रेलवे न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. यह आंदोलन राज्यसभा सदस्य सत्यनारायण जटिया के नेतृत्व में हुआ था. बताया जा रहा है कि जिनके खिलाफ वारंट जारी हुआ है उनमें से अधिकांश बीजेपी के कार्यकर्ता हैं. जीआरपी द्वारा इन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा. 

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वहीं भिण्ड में 9 अगस्त को संभावित आंदोलन की चेतावनी के बाद इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला लिया है. कलेक्टर आशीष गुप्ता ने गृह विभाग को पत्र भी लिखा है. 8 अगस्त की रात से 10 अगस्त सुबह छह बजे तक इंटरनेट सेवाए बंद करने के लिए आग्रह किया है. सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर पाबंदी लगाने के लिए और किसी भी भड़काऊ पोस्ट को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का कलेक्टर ने निर्णय लिया है. 

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