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मध्यप्रदेश में बैंड बाजा रोजगार : ड्राइविंग सीखना चाहने वालों को सिलाई-कढ़ाई की ट्रेनिंग!

सौ दिनों के रोजगार का वादा करके आधी अधूरी तैयारियों के साथ लागू की गई योजना लोगों को नहीं आ रही रास

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खास बातें

  1. गाड़ी चलाना सीखने के लिए आवेदन किया, भेज दिया सिलाई केंद्र में
  2. प्रशिक्षक ने कहा- पशु चराने वाले तक आ गए उनको क्या ट्रेनिंग दूंगी
  3. कांग्रेस कह रही हालात दुरुस्त हो जाएंगे, बीजेपी ने कहा- भद्दा मजाक
भोपाल:

मध्यप्रदेश में पंद्रह सालों के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस सरकार ने युवाओं को लुभाने के लिए युवा स्वाभिमान योजना लागू की थी. इसमें युवाओं के लिए सौ दिनों के रोजगार का वादा किया गया था लेकिन आधी अधूरी तैयारियों के साथ लागू की गई ये योजना अब कई लोगों को रास नहीं आ रही है.
     
धानुक बंशकार समाज के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता कुछ दिनों पहले कांग्रेस दफ्तर के बाहर मुख्यमंत्री कमलनाथ को बैंड बजाकर धन्यवाद दे रहे थे. यह धन्यवाद मुख्यमंत्री की उस चाहत के लिए जिसमें वे छिंदवाड़ा में एक इंस्टीट्यूट खोलकर युवाओं को बैंड बाजा बजाना सिखाकर रोज़गार देना चाहते हैं. सिर्फ बैंड बजाना ही क्यों, ब्यूटीशियन, टेलरिंग, कॉल सेंटर, वीडियोग्राफी, जानवर चराने जैसे कई हुनर का प्रशिक्षण राज्य सरकार देना चाहती है.

लेकिन हकीक़त में हो क्या रहा है? 25 साल के विकास गोरे बता देंगे, 12 वीं के बाद गाड़ी चलाना सीखने के लिए आवेदन दिया, एसएमएस भी आ गया लेकिन जिस ट्रेनिंग की चाहत थी आगरमालवा में वो मौजूद नहीं, लिहाज़ा उन्हें सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र भेज दिया गया. गोरे ने बताया कि मैंने ऑनलाइन फॉर्म डाला था, 3 ट्रेड डाले थे मैंने ऑफिस असिस्सटेंट, ड्राइवर, ऑटोमोबाइल का डाला था मेरा ऑनबोर्डिंग में ड्राइवर का मिला था, बताया था कि कौशल विकास केन्द्र में संपर्क करना यहां सिलाई और ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग दी जाती है, यहां के अनुभव मैं क्या कर सकता हूं.
     
कॉन्ट्रैक्ट सुपरवाइजर के लिए आवेदन करने वाली सीमा मालवीय की तकलीफ भी इससे अलग नहीं है. वे कहती हैं मैंने कॉन्ट्रेक्ट सुपरवाइजर के लिए भरा था उस हिसाब से ट्रेनिंग होनी चाहिए, यहां ब्यूटीशियन और सिलाई का होता है सरकार को इन सबके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करनी चाहिए थी.
     
दरअसल सरकार ने लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए योजना तो ताबड़तोड़ शुरू कर दी, शायद इसके लिए जरूरी व्यवस्थाएं करना भूल गई. आगर मालवा में मोज़ेक ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की इंचार्ज ममता बिरथरे कहती हैं यहां पशु चराने वाले तक आ गए उनको क्या ट्रेनिंग दूंगी. ये कठिनाई तो है शासन को ये करना चाहिए कि 20-20 के बैच बना दे और ट्रेड दे दे तो हम सेट अप जमा लें उसकी ट्रेनिंग भी दें.


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इस योजना के तहत दो लाख रुपये से कम आय वाले 21 से 30 वर्ष उम्र के युवाओं को 90 दिनों के लिए कौशल प्रशिक्षण देने के लिए 98701 सीटें हैं जिसमें सिलाई और ब्यूटीशियन की ही अकेले लगभग 32000 सीटे हैं, हार्डवेयर की 21300, डेटा एंट्री की 17672. योजना में एक साल में 100 दिनों के लिए, 4,000/- रुपये प्रति माह स्‍टाइपेंड पर नगरीय निकायों में अस्‍थाई रोजगार दिया जाएगा, जहां काम में 33% और प्रशिक्षण में 70% न्यूनतम उपस्थिति होने ही चाहिए ऐसे में नगरीय इकाई काम तो दे रही है लेकिन प्रशिक्षण का हाल आपने देख लिया काम ड्राइवर का तो प्रशिक्षण सिलाई-कढ़ाई.

अब कांग्रेस कह रही है हालात दुरुस्त हो जाएंगे वहीं बीजेपी इसे भद्दा मज़ाक मानती है. कांग्रेस प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा ने कहा  कुछ जिलों में ऐसी बातें सामने आई हैं कि ट्रेनिंग सेंटर नहीं है लेकिन हम उसकी व्यवस्था कर रहे हैं कुछ दिनों के अंदर जितने रोजगार के साधन हैं सब मिलेंगे. वहीं बीजेपी के दुर्गेश केसवानी का कहना था  कमलनाथ जी की सरकार ने भद्दा मजाक पढ़े लिखे बेरोजगारों के साथ किया है क्या वो जानवर चराने जाएगा. ये सिर्फ रस्मअदाएगी का काम कर रहे हैं.

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इस योजना में मध्यप्रदेश का स्थायी निवासी होने की शर्त भी शामिल है, मकसद था दो साल 53 फीसद बढ़ी बेरोजगारी का रोकना लेकिन अभी मंजिल बहुत दूर दिख रही है. पकौड़े को रोजगार से जोड़ने पर विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने राज्य में कई जगह पकौड़े तलकर विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन सत्ता मिलने पर उसे बैंड बाजे, पशु चराने में भी रोजगार दिखता है.



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