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इस महिला ने 157 मामलों में 4380 दिन जेल में काटे, दोष साबित न होने के कारण हुई रिहा, देखें- VIDEO

जीवन का बड़ा हिस्सा कारागार में गुजारने वाली निर्मलक्का ने रुंधे गले से कहा, मैं कुछ नहीं कहना चाहती, बस अब अपना वक्त परिवार के साथ बिताना चाहती हूं

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इस महिला ने 157 मामलों में 4380 दिन जेल में काटे, दोष साबित न होने के कारण हुई रिहा, देखें- VIDEO

दंतेवाड़ा में12 साल बाद जेल से रिहा होकर बाहर निकलीं निर्मलक्का.

खास बातें

  1. साल 2007 में निर्मलक्का को उनके पति के साथ गिरफ्तार किया गया था
  2. सबूतों और गवाहों के बयान पर किसी मामले में जुर्म साबित नहीं हुआ
  3. पति चंद्रशेखर को न्यायालय ने पहले ही रिहा कर दिया था
दंतेवाड़ा:

जेल में काटे 4380 दिन, 12 साल परिवार से दूर सींखचों के पीछे बिताए...और अब जुर्म साबित न होने के कारण कोर्ट ने रिहाई का आदेश दिया. जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा बंदिनी के रूप में गुजारने के बाद आज निर्मलक्का आजाद हुईं. उन्हें नक्सली गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था जो कि साबित नहीं हुए.   

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित संवेदनशील जिले बस्तर की यह कहानी, यहां की महिला निर्मलक्का के सब्र की इंतेहां की भी कहानी है. निर्मलक्का 157 मामलों में 4380 दिन जेल में रहने के बाद रिहा हुई हैं. साल 2007 में निर्मलक्का को उनके पति चन्द्रशेखर रेड्डी के साथ पुलिस ने रायपुर में गिरफ्तार किया था. 12 साल जेल में रहने और सभी मामलों में अलग-अलग अदालतों में सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर उनके खिलाफ जुर्म साबित नहीं हुआ. आखिरकार उनकी रिहाई के आदेश दे दिए गए.

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निर्मलक्का के खिलाफ अंतिम मामले में दंतेवाड़ा कोर्ट ने दो अप्रैल को सुनवाई की और उन्हें रिहा करने के आदेश दिए. इसके बाद बुधवार को सुबह करीब 11 बजे उन्हें केंद्रीय कारागार से मुक्त किया गया.

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सबूतों के अभाव में निर्मलक्का के पति चंद्रशेखर को न्यायालय ने पहले ही रिहा कर दिया था. निर्मलक्का को जेल में ही रखा गया. सभी मामलों में सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर निर्मलक्का के खिलाफ जुर्म साबित न होने पर दंतेवाड़ा कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया.

जेल से रिहा होने के बाद निर्मलक्का ने बताया कि साल 2007, 2008, 2014 और 2015 में भी नए-नए मामले दर्ज होते रहे, लेकिन किसी में भी अपराध साबित नहीं हो पाया. जब उनसे पूछा गया कि इतना लंबा वक्त उन्होंने जेल में बिताया तो क्या वे शासन से कुछ कहना चाहती हैं? उन्होंने रुंधे गले से सिर्फ इतना कहा ... मैं कुछ नहीं कहना चाहती, बस अपना वक्त परिवार के साथ बिताना चाहती हूं.

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