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SBI ने बना दिए एक खाते के दो मालिक, एक पैसे डालता रहा, दूसरा मोदी जी भेज रहे समझकर निकालता रहा

खाता खुलवाने के बाद रूरई का हुकुम सिंह कुशवाहा रोज़ी कमाने हरियाणा चला गया. यहां पैसे बचाकर वो खाते में जमा करवाता रहा उधर रोनी गांव का हुकुम सिंह बैंक पहुंचकर पैसे निकालता रहा.

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SBI ने बना दिए एक खाते के दो मालिक, एक पैसे डालता रहा, दूसरा मोदी जी भेज रहे समझकर निकालता रहा

रोनी गांव निवासी हुकुम सिंह.

खास बातें

  1. आरोप है कि इस बात को बैंक के अधिकारियों ने दबाने की कोशिश की
  2. मामला का खुलासा तब हुआ जब हुकुम सिंह को ज़मीन खरीदनी थी
  3. बैंक मैनेजर राजेश सोनकर ने कहा कि पैसा खाताधारक को मिल जाएगा
भोपाल:

मध्यप्रदेश के भिंड में एक शख्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी भाषण को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से लेता रहा, जिससे अब वो परेशानी में है. मामला भिंड ज़िले के आलमपुर में स्थित एसबीआई बैंक का है. यहां बैंक की गलती से एक शख्स की गाढ़ी कमाई कोई दूसरा उसी खाते से निकालता रहा, ये समझकर कि पैसा मोदी जी भेज रहे हैं.  दरअसल हुआ कुछ यूं कि यहां रूरई गांव के रहने वाले हुकुम सिंह और रोनी गांव के रहने वाले हुकुम सिंह, दोनों ने आलमपुर ब्रांच में खाता खुलवाया. बैंकर बाबू ने क्या किया कि पासबुक में सिर्फ फ़ोटो अलग-अलग लगवाई बाकी दोनों का पता, और खाता नंबर एक ही दे दिया. यानी खाता एक और मालिक दो.

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खाता खुलवाने के बाद रूरई का हुकुम सिंह कुशवाहा रोज़ी कमाने हरियाणा चला गया. यहां पैसे बचाकर वो खाते में जमा करवाता रहा उधर रोनी गांव का हुकुम सिंह बैंक पहुंचकर पैसे निकालता रहा. वो भी एक दो नहीं पूरे 6 महीने तक.  6 महीने में कमाने वाले हुकुम सिंह के खाते से खर्च करने वाले हुकुम सिंह ने 89 हज़ार रुपये निकाल लिए.

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मामला का खुलासा तब हुआ जब रूरई गांव वाले हुकुम सिंह को ज़मीन खरीदनी थी, जिसके लिए वो 16 अक्टूबर को रुपए निकालने बैंक पहुंचे. यहां उन्होंने देखा कि उनके खाते में सिर्फ 35 हजार 400 रुपए बचे, जबकि उनके मुताबिक वे अब तक 1 लाख 40 हजार रुपये जमा कर चुके थे. इसके बाद उन्होंने बैंक कर्मियों से इसकी शिकायत की लेकिन उनका आरोप है कि इस बात को बैंक के अधिकारियों ने दबाने की कोशिश की.

बैंक मैनेजर राजेश सोनकर ने उनसे कहा कि पैसा खाताधारक को मिल जाएगा. लेकिन पता लगा पैसे तो रोनी निवासी हुकुम सिंह के पास हैं जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा,  ''मेरा खाता था. उसमें पैसा आया. मैं सोच रहा था मोदीजी पैसा दे रहे हैं तो मैंने निकाल लिया. हमारे पास पैसा नहीं था, हमारी मजबूरी थी. हमने घर में काम करवाया है और इसलिये पैसा हमें निकालना पड़ा.'' रोनी निवासी हुकुम सिंह ने इस लापरवाही के लिए बैंक वालों को जिम्मेदार बताया है. 
(भिंड से दिलिप सोनी के इनपुट के साथ)



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