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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव : मतदाताओं के स्मार्टफोन तक की जानकारी है बीजेपी के पास, कांग्रेस 'सत्ता विरोधी लहर' के भरोसे

आपको बता दें कि पन्ना प्रभारी की तैनाती करना मूल रूप से वरिष्ठ भाजपा नेता कुशाभाऊ ठाकरे का विचार था. 1998 में ये रणनीति मध्यप्रदेश में लागू की थी.

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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव : मतदाताओं के स्मार्टफोन तक की जानकारी है बीजेपी के पास, कांग्रेस 'सत्ता विरोधी लहर' के भरोसे

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ( फाइल फोटो )

भोपाल:

कर्नाटक चुनावों के बाद बीजेपी पूरा ध्यान मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में लगाने वाली है. सूत्रों की मानें तो तीनों राज्यों के लिये कमांड सेंटर भोपाल में ही होगा. चुनावों के मद्देनज़र पार्टी कई नीतियों पर काम कर रही है जिसमें से एक है हॉफ पेज प्रभारी. हालांकि कांग्रेस को लगता है जनता की नाराजगी सत्ताधारी पार्टी की हर रणनीति पर भारी पड़ेगी. मध्यप्रदेश के 5,07,80,373 मतदाताओं को 65,200 बूथों पर रिझाने के लिए बीजेपी अगले विधानसभा चुनाव में हर पोलिंग बूथ पर निर्वाचन सूची के हर पेज के लिये प्रभारियों को तैनात करेगी. गणित कुछ यूं समझें. एक बूथ पर लगभग 1000 वोटर होते हैं. एक बूथ की पोलिंग लिस्ट में लगभग 30 पेज होते हैं. यानी एक पेज पर लगभग 30 वोटर, इनके लिये ही पेज प्रभारियों की नियुक्ति होगी. हर प्रभारी से कहा गया है अभी से अपने मतदाताओं के संपर्क में रहें.

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इन प्रभारियों से संपर्क के लिये ना सिर्फ संभाल बल्कि ज़िला स्तर तक में कॉल सेंटर बनाए गये हैं. इतनी बड़ी तादाद में नियुक्त पन्ना प्रमुखों से संवाद कैसे होगा इस बारे में मध्यप्रदेश बीजेपी उपाध्यक्ष विजेश लूणावत ने बताया, 'हमने प्रदेश से संभाग स्तर तक कॉल सेंटर बनाये हैं, संभाल से जिले में कॉल सेंटर बने हैं, हर मंडल का प्रभारी है, वहां से ग्राम-नगर के शक्ति केन्द्र बने हैं उसके प्रभारी हैं, वहां से बूथ का पालक संयोजक है उसके प्रभारी हैं. उसके बाद पन्ना प्रमुख है. यानी पूरी चेन बनी हुई है, उसके माध्यम से संपर्क करते हैं. खास फोकस उनपर जो बीजेपी के परंपरागत वोटर नहीं हैं.'

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के पास ये तक जानकारी है कि किस बूथ में कितने मतदाता स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन कांग्रेस को लगता है ऐसी कवायदों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. पन्ना प्रमुख का जवाब वो अपने मंडलम से देंगे. कांग्रेस प्रवक्ता मानक अग्रवाल ने कहा, 'मध्यप्रदेश में किसी स्ट्रेटजी का असर नहीं पड़ेगा. इनको पता ही नहीं है कांग्रेस ने निचले स्तर पर मंडलम बना दिये हैं, हर सेंटर पर 10 युवा हमने तैयार किये हैं, हमारे पास डेटा है, इनका जाना तय है.'

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वोटरों की तादाद देखते हुए हॉफ पेज प्रभारियों का आंकड़ा 30 लाख से ज्यादा पहुंच सकता है जिसके चयन के लिये पार्टी ने मशक्कत शुरू कर दी है. पन्ना प्रभारी की तैनाती करना मूल रूप से वरिष्ठ भाजपा नेता कुशाभाऊ ठाकरे का विचार था. 1998 में ये रणनीति मध्यप्रदेश में लागू की गई थी. उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में और हाल में कर्नाटक में इसे कामयाबी से आजमाया गया.. सत्ता भले हाथ में आकर चली गई लेकिन विधायक बढ़ गये.



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