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छत्तीसगढ़ विधानसभा ने 2018-19 के लिए द्वितीय अनुपूरक मांग ध्वनिमत से किया पारित 

वर्ष 2018-19 का मुख्य बजट लगभग 87 हजार 463 करोड़ रूपए का था. प्रथम एवं द्वितीय अनुपूरक बजट की राशि शामिल करने पर अब बजट का आकार बढ़कर 94 हजार 775 करोड़ रूपए हो गया है.

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छत्तीसगढ़ विधानसभा ने 2018-19 के लिए द्वितीय अनुपूरक मांग ध्वनिमत से किया पारित 

रमन सिंह सरकार ने पास किया बजट

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को चर्चा के बाद वर्ष 2018-19 के लिए दो हजार 433 करोड़ 78 लाख रूपए की द्वितीय अनुपूरक मांग ध्वनिमत से पारित कर दी गई. इसमें से 2400 करोड़ रूपए की राशि किसानों को धान का बोनस देने के लिए निर्धारित की गई है. वर्ष 2018-19 का मुख्य बजट लगभग 87 हजार 463 करोड़ रूपए का था. प्रथम एवं द्वितीय अनुपूरक बजट की राशि शामिल करने पर अब बजट का आकार बढ़कर 94 हजार 775 करोड़ रूपए हो गया है. पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा के बाद द्वितीय अनुपूरक पारित किया गया. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि द्वितीय अनुपूरक में 2400 करोड़ रूपए की राशि का किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का बोनस देने के लिए प्रावधान किया गया है. किसानों को प्रति क्विंटल 300 रूपए का बोनस दिया जाएगा. सिंह ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2018 के प्रशासनिक कार्यों के लिए 33 करोड़ 78 लाख रूपए और राजस्व व्यय के लिए 2434 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जब किसानों को धान बोनस देने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है. तीज और गणेश चतुर्थी के अवसर पर किसानों के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा ने धान बोनस के लिए राशि की मंजूरी दी है. यह कदम दर्शाता है कि राज्य शासन की प्राथमिकता में किसान पहले क्रम में हैं. सिंह ने कहा कि राज्य में बेहतर वित्तीय प्रबंधन के कारण किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ ही बोनस का भुगतान करने का निर्णय दिया गया है. जब किसान खुशहाल होगा, तो प्रदेश में खुशहाली आएगी. प्रदेश में एक नवम्बर से धान खरीदी शुरू होगी. किसानों को धान के समर्थन मूल्य के साथ बोनस की राशि भी जोड़कर दी जाएगी.

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रमन सिंह ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में राज्य सरकार द्वारा राज्य गठन के बाद प्रथम तीन वर्ष की तुलना में किसानों से समर्थन मूल्य पर चार गुना अधिक धान खरीदा गया और 9 गुना अधिक राशि का भुगतान किया गया. पिछले 15 वर्षों में किसानों से लगभग 7 करोड़ 53 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और किसानों को 95 हजार 136 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया, जिसमें से किसानों से बोनस के रूप में 9 हजार 712 करोड़ रूपए की राशि भी दी गई. राज्य गठन के प्रथम तीन वर्षों में मात्र 39.61 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और किसानों को दो हजार 159 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया. पिछले 15 वर्षों के दौरान प्रतिवर्ष किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीदी पर औसतन छह हजार 343 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया, जबकि राज्य गठन के बाद के प्रथम तीन वर्षों में किसानों को औसतन 720 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था.

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गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में इस वर्ष के आखिर में विधानसभा के चुनाव होने है. राज्य की भाजपा सरकार ने इस वर्ष धान खरीदी के दौरान ही किसानों को बोनस देने का फैसला किया है. विधानसभा के इस विशेष सत्र में अनुपूरक बजट लाकर सरकार ने संदेश देने की कोशिश की है भाजपा सरकार के लिए किसान सबसे महत्वपूर्ण है. इस दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह ने आरोप लगाया कि लंबे शासनकाल के दौरान कांग्रेस ने केवल दावे किए लेकिन किसानों और गरीबों के लिए कुछ नहीं किया. बाद में सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई. (इनपुट भाषा से) 


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