छत्तीसगढ़ सरकार ने झीरम घाटी हमले में जान गंवाने वाले महेंद्र कर्मा के बेटे को दी डिप्टी कलेक्टर की नौकरी

छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने बड़ा फैसला किया है. राज्य सरकार ने महेंद्र कर्मा (Mahendra Karm) के पुत्र को डिप्टी कलेक्टर की नौकरी देने का निर्णय लिया है. 

छत्तीसगढ़ सरकार ने झीरम घाटी हमले में जान गंवाने वाले महेंद्र कर्मा के बेटे को दी डिप्टी कलेक्टर की नौकरी

सरकार ने महेंद्र कर्मा के बेटे को डिप्टी कलेक्टर की नौकरी देने का निर्णय लिया है. 

नई दिल्ली :

छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने बड़ा फैसला किया है. राज्य सरकार ने झीरम घाटी हमले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के फैसले के बाद अब 'बस्तर टाइगर' के नाम से विख्यात शहीद महेंद्र कर्मा (Mahendra Karma)के पुत्र को डिप्टी कलेक्टर की नौकरी देने का निर्णय लिया है. डिप्टी कलेक्टर की नौकरी पाने वाले आशीष कर्मा झीरम हमले में शहीद हुए महेंद्र कर्मा के तीसरे बैटे हैं. कैबिनेट की बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि बैठक में किसानों के और वनवासियों के मुद्दे पर चचार्एं हुईं. राज्य सरकार के पास महेंद्र कर्मा ( Mahendra Karma) के बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रस्ताव आया था. राज्य सरकार ने उन्हें डिप्टी कलेक्टर बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है. गौरतलब है कि नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा की हत्या झीरम हमले में 25 मई, 2013 को की थी. महेंद्र कर्मा की हत्या के बाद उनकी पत्नी देवती कर्मा दंतेवाड़ा से चुनाव जीती थीं. हालांकि इस हमले के पीछे से पर्दा नहीं उठ सका है. 

आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस बार बीजेपी की 15 सालों की सत्ता को उखाड़ फेंकने में कामयाबी पाई. उसने इस बार 90 में से 68 सीटें जीती हैं जबकि बीजेपी को 15 और अन्य को 7 सीटें मिली हैं. राज्य में सरकार बनने के बाद ही भूपेश बघेल ने झीरम घाटी हमले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का ऐलान किया. पिछले दिनों एनडीटीवी से बातचीत में सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि हम गांधीजी के रास्ते पर चल रहे हैं, सत्य के रास्ते पर और सत्याग्रह करना हमारा अधिकार है. न्याय दिलाना भी तो बदला अलग बात है और न्याय के लिये लड़ना दूसरी बात है . झीरम घाटी में हमारे नेता शहीद हुए. अभी हमने एनआईए को पत्र लिखा था कि केस वापस कर दें हमने एसआईटी का गठन कर दिया है, लेकिन केंद्र सरकार ने दुर्भावनवश हमको अनुमति नहीं दी है. इसका मतलब यह है कि वह नहीं चाहते कि झीरम घाटी के तह में कोई जाए. पूरे विश्व में राजनेताओं के नरसंहार का ये पहला उदाहरण है और उसके अगर तथ्य उजागर हों तो किसकी तकलीफ होगी और अगर बीजेपी की केंद्र सरकार अनुमति नहीं दे रही है तो इससे स्पष्ट हो जाता है कि दाल में कहीं कुछ काला है. (इनपुट-आईएएनएस)

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