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Teachers' Day : शिक्षक हैं या सुपरमैन! तीन क्लास, 18 पीरियड; पढ़ाने के साथ दफ्तर संभालने वाला एक टीचर

Teachers' Day 2019:: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के कांकेर में ऐसे कई स्कूल जहां की शिक्षा व्यवस्था चौंकाने वाली

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Teachers' Day : शिक्षक हैं या सुपरमैन! तीन क्लास, 18 पीरियड; पढ़ाने के साथ दफ्तर संभालने वाला एक टीचर

छत्तीसगढ़ के मरदा खास गांव के स्कूल के शिक्षक मोहनलाल वर्मा और उनके विद्यार्थी.

खास बातें

  1. मरदा खास के स्कूल में छठी से आठवीं तक पढ़ने वाले 48 बच्चे
  2. सन 2013 से स्कूल में सभी बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ एक शिक्षक
  3. पढ़ाने के अलावा मध्यान्न भोजन व्यवस्था और दफ्तर का जिम्मा भी
भोपाल:

शिक्षक दिवस (Teachers' Day) पर कई शिक्षक सम्मानित हो रहे हैं, लेकिन कई शिक्षक ऐसे भी हैं जो बगैर सम्मान सुपरमैन हैं.. चौंकिए मत, यह हकीकत है, देश के नक्सल प्रभावित इलाकों की. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के कांकेर में ऐसे कई स्कूल हैं जहां शिक्षा व्यवस्था चौंकाने वाली है. कोयलीबेड़ा में तो 82 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ने वाले कक्षा पहली से पांचवी तक के हजारों बच्चे आज भी एक-एक शिक्षक के भरोसे बैठे हैं.

नक्सल प्रभावित कोयलीबेड़ा मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर मरदा खास में ऐसा ही एक स्कूल है. यहां छठी से आठवीं तक 48 बच्चे पढ़ते हैं, कुल 18 पीरियड लगने चाहिये, लेकिन इन 18 पीरियड को संभालने सरकार ने 2013 से स्कूल को अलग-अलग 'सुपरमैन' दिए. 'सुपरमैन' इसलिए क्योंकि 18 पीरियड, तीन अलग-अलग क्लास और विषय, लेकिन पढ़ाने वाला शिक्षक एक, मोहनलाल वर्मा. इन शिक्षकों के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण है पढ़ाना. अकेला टीचर 18 पीरियड. कुछ भी हो इससे बच्चों का तो नुकसान हो रहा है.

शिक्षक को पढ़ाने के अलावा मध्यान्न भोजन, प्रमाण पत्र जैसे तमाम दफ्तर के काम भी करने होते हैं. ऐसे में पढ़ाने के अलावा स्कूल पर ध्यान दें तो कैसे? स्कूल में शौचालय का सिर्फ ढांचा है, पीने का साफ पानी नहीं मिलता है. सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों की पढ़ाई को लेकर है. यहां पढ़ने वाली दिव्या मंडावी कहती हैं. पढ़ाई नहीं हो पाता है, समझ नहीं पाते हैं. वहीं शैलेन्द्र कहते हैं हमारे यहां एक ही सर हैं, ठीक से पढ़ाई नहीं होती... लाइट नहीं है, शौचालय नहीं है, जंगल जाना पड़ता है. सुखचंद का कहना है कि पढ़ाई ढंग से नहीं होती, एक टीचर कितना पढ़ाएंगे.


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नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि छत्तीसगढ़ में प्राइमरी के सिर्फ 51.67 बच्चों में भाषा, गणित और पर्यावरण को जानने-समझने की क्षमता है. सेकेंडरी में 45 बच्चे ही हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान में बेहतर कर पाते हैं. कुछ महीनों पहले छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया था कि राज्य में स्कूलों में प्रिंसिपलों के कुल 47562 पदों में से 24936 पद रिक्त हैं. पंचायत शिक्षकों के 53000 पद रिक्त हैं. नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में 75 प्रतिशत से अधिक स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं.

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एक आंकड़े के मुताबिक देश में स्कूली शिक्षकों के पांच लाख से ज्यादा पद खाली हैं. वैश्विक स्तर पर अपने देश में शिक्षक छात्रों का अनुपात बेहद खराब हैं. ऐसे में बेहतर न हो कि कम से कम शिक्षक दिवस पर देश इन स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती की सौगात दे.

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(कांकेर से जयंत के इनपुट के साथ)



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