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भारत बंद के 6 दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से कोसों दूर हैं हिंसा के आरोपी

2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान हिंसा में मध्यप्रदेश में 8 लोगों की मौत हुई, देश भर में दलित सड़कों पर उतरे. नाराजगी 1989 में बने कानून को कथित तौर पर कमजोर करने को लेकर थी.

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भारत बंद के 6 दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से कोसों दूर हैं हिंसा के आरोपी
नई दिल्ली: 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान हिंसा में मध्यप्रदेश में 8 लोगों की मौत हुई, देश भर में दलित सड़कों पर उतरे. नाराजगी 1989 में बने कानून को कथित तौर पर कमजोर करने को लेकर थी. एनडीटीवी ने जब ग्राउंड जीरो के साथ एफआईआर की पड़ताल की पता लगा मरने वालों में 6 दलित थे, 6 दिन बीत गये लेकिन आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं.भिंड के मेहगांव में 2 अप्रैल को बंद के दौरान हिंसा का तांडव ग्वालियर से लगभग डेढ़ घंटे की दूरी पर बसे मेहगांव में दो दलित लड़कों 22 साल के प्रदीप और 15 साल के आकाश जाटव को गोली लगी. प्रदीप ने ग्वालियर के आईटीआई से डिप्लोमा किया था, नौकरी की तलाश में था. प्रदर्शनकारियों के साथ वो मेहगांव में था जब उसे गोली मारी गई.

FIR के मुताबिक सोनू, मोनू और बल्लू राठौर आरोपी हैं, सब सवर्ण जिन्होंने छत से गोलियां चलाईं, ये तीनों आकाश की मौत के भी आरोपी हैं. 15 साल का आकाश बाज़ार से सब्जी खरीदने गया था, घर आई तो उसे गोली लगने की खबर. पिता का साया बहुत पहले उठ गया था. मां आकाश को अफसर बनाना चाहती थीं. 

6 दिन बीत गये, 3 आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई वो फरार हैं, उनकी सूचना देने पर 10,000 रूपये के इनाम का ऐलान किया गया है. प्रदीप और आकाश उन 6 दलितों में से हैं जिनकी 2 अप्रैल को मौत हुई. हर मृतक के परिजन का कहना है गोली सवर्णो ने चलाई.
 
40 साल के दशरथ जाटव का शव, भिंड में रोन थाने के करीब 3 अप्रैल को खेतों में मिला. प्रदर्शन के दौरान जब प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर खदेड़ा गया तो वो थाने में घुस गये. दशरथ अंदर नहीं आ पाए. परिवार का आरोप है सवर्णों ने उन्हें घसीटा फिर पीट-पीटकर मार डाला.

सवाल ग्वालियर के थाटीपुरा में 22 साल के दीपक जाटव की मौत पर भी है. राजा चौहान ने जहां गोली चलाई उस गली में 22 साल के दीपक जाटव की चाय की टपरी थी, परिवार उसी की कमाई के आसरे था. पिता कहते हैं बेटे की लाश को घर तक लाने नहीं दिया. ये दर्द समझने आपको बस्ती गोदाम में घुसना होगा. बैठना होगा उस बाप के पास जिसने तीन गोलियों से छलनी अपने बेटे को विदा किया है.

वैसे सवाल हैं, जब पूछा तो पुलिस ने कहा उसे फॉरेंसिक का इंतजार है. फिर पिता को कैसे बताया गोली किससे चली, और तो और राजा चौहान के खिलाफ मामला भी गैर इरादतन हत्या का दर्ज हुआ है, क्या वहां राजा के अलावा भी किसी ने गोली चलाई है.

एसएसपी डॉ आशीष,  ने कहा- ''जो साक्ष्य हैं तो अपराध पंजीबद्ध किया और अगर साक्ष्य आते हैं तो हम करेंगे (( पैच )) फॉरेंसिक एक्सपर्ट से चर्चा करके क्नक्लूड कर पाएंगे'' ग्वालियर के ही भीमपुरा में 40 साल के राकेश जाटव को गोली लगी, हर दिन कुम्हारपुरा मजदूरी करने जाते थे. बिटिया टिफिन बांधकर देती थी. घर से 300 मीटर दूर उन्हें गोली लगी. 40 साल के महावीर राजावत की मौत मच्छंड में हुई, बताया जा रहा है कि उन्हें खबर लगी कि प्रदर्शनकारियों ने उनके भाई की दुकान को आग लगा दिया. महावीर जब बाजार पहुंचे तो उनकी पिटाई हो गई. उन्हें थाने के बाहर गोली मारी गई. मामले में 2 पुलिसवाले भी आरोपी हैं.

दोनों आरोपी दलित हैं, सूत्रों का कहना है कि जांच इस बात पर भी हो रही है कि क्या भीड़ ने आरोपियों को गोली चलाने के लिये उकसाया और क्या इसके पीछे जातिगत द्वेष था. राजावत के पिता का कहना है वो किसी से लड़ना नहीं चाहते. 

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20 साल के राहुल पाठक की मौत मुरैना में हुई. हालांकि पुलिस इसे बंद के दौरान हिंसा से नहीं जोड़ रही. मामले में रामू गुर्जर सहित दो लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई है. पिता कहते हैं बंद की आड़ में पुरानी दुश्मनी निकाली गई. 

जिनके अपनों की मौत हुई उनके घाव भरने में वक्त लगेगा. फिलहाल उन्हें गोली चलाने वालों से जवाब चाहिये. खुफिया विभाग फिलहाल इसके जवाब में कह रहा है कि दंगे फैलाने के लिये संगठनों को कई अफसरों, व्यापारियों ने मोटी रकम दी. लोगों को चिन्हिंत किया गया है. जांच जा रही है. बहरहाल रिपोर्ट आने में वक्त लगेगा लेकिन एक बात तय है कि राज्य में जाति की खाई और गहरी हो गई है.


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