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इंसानियत शर्मसार: मध्य प्रदेश में इस गरीब का शव ठेले पर ले जाने को मजबूर परिवार

मृतक के परिजनों के पास पैसे नहीं थे, इसलिये उन्हें जिला मेडिकल कॉलेज से शव हाथ ठेला पर ले आने को मजबूर होना पड़ा. 

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इंसानियत शर्मसार:  मध्य प्रदेश में इस गरीब का शव ठेले पर ले जाने को मजबूर परिवार

ठेले पर शव ले जाते मृतक के परिजन.

खास बातें

  1. इस गरीब का शव ठेले पर ले जाने को मजबूर परिवार
  2. मध्य प्रदेश के सागर की घटना
  3. अस्पताल ने नहीं दी शव गाड़ी
सागर: सागर मेडिकल कॉलेज और जिला प्रशासन से एक गरीब को फिर बेबसी में लौटना पड़ा. दरअसल, मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार रात नौ बजे एक मरीज की मौत हो गई. मृतक के परिजनों के पास पैसे नहीं थे, इसलिये उन्हें जिला मेडिकल कॉलेज से शव हाथ ठेला पर ले आने को मजबूर होना पड़ा.बता दें कि शासन की योजना है कि किसी भी व्यक्ति का शव भेजने का काम अस्पताल प्रबन्धन का होता है, पर सागर मेडिकल कॉलेज में इस गरीब के साथ नजारा कुछ दूसरा ही निकला. इस गरीब के पास ना तो ऑटो का किराया देने के लिये रुपये थे और ना ही अस्पताल प्रबन्धन की तरफ से शव ले जाने के लिये कोई भी वाहन मिला. 

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प्रशासन पूरे मामले में शव वाहन की कमी का रोना रो रहा है. पिछले साल भी ऐसी ही एक खबर आई थी. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र राजनंदगांव में एक परिवार को अपनी बच्ची का शव ठेले पर ले जाना पड़ा था. आरोप था कि जिला अस्पताल ने शव ले जाने के लिए शव वाहन पहले तो देने से इंकार कर दिया, बाद में लेट-लतीफी करने लगे, जिससे नाराज़ परिजनों ने किराये पर ठेला लिया और उसमें ही शव ले गए थे.

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छुरिया के बखरूटोला में 17 साल की खिलेश्वरी ने बीते साल 2 जुलाई को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. जिसके बाद उका शव मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में ही रखा गया था.


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