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कभी डाकुओं के सरदार रहे मोहर सिंह ने लगाई प्रधानमंत्री से गुहार, बोले- 'मंदिर बचाओ'

बुंदेलखंड के बीहड़ों में कभी अपनी गोली से राज करने वाले डाकुओं के सरदार मोहर सिंह (Mohar singh) ने 85 साल की उम्र में प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) से मंदिर का जीर्णोद्वार करने की गुहार लगाई है.

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कभी डाकुओं के सरदार रहे मोहर सिंह ने लगाई प्रधानमंत्री से गुहार, बोले- 'मंदिर बचाओ'

Mohar singh: पूर्व दस्यु सम्राट मोहर सिंह

खास बातें

  1. 85 साल के पूर्व दस्यु सम्राट मोहर सिंह की गुहार
  2. 'मंदिरों का हो जीर्णोद्वार'
  3. उनके ऊपर दर्ज थे हत्या-लूट के करीब ढ़ाई सौ मुकदमे
मध्य प्रदेश:

बुंदेलखंड के बीहड़ों में कभी अपनी गोली से राज करने वाले डाकुओं के सरदार ने 85 साल की उम्र में प्रधानमंत्री से मंदिर का जीर्णोद्वार करने की गुहार लगाई है. जी हां, करीब 85 साल के पूर्व दस्यु सम्राट मोहर सिंह (Mohar Singh) ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि मुरैना के बटेश्वरा मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया जाए. मुरैना के बटेश्वर में गुप्तकाल से गुर्जर प्रतिहार काल के करीब 200 मंदिर जीर्ण-शीर्ण हालत में बिखरे पड़े हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है.

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सालों से ASI के जीर्णोद्वार का रुका है काम-


बटेश्वर मंदिरों की श्रृंखला मुरैना के दूर दराज इलाकों में स्थित है. इस इलाके में पहले कुख्यात डाकू निर्भय सिंह गुज्जर, मोहर सिंह और तहसीलदार सिंह का दबदबा था. लेकिन अब डाकुओं के सरदार रह चुके मोहर सिंह का कहना है कि इन ऐतिहासिक मंदिरों का जीर्णोद्वार कराया जाए ताकि युवाओं को पता हो कि उनकी ऐतिहासिक धरोहरें कितनी समृद्ध थी. दरअसल ASI ने बटेश्वर मंदिर के जीर्णोद्वार का काम 2005 में शुरू किया था. उस वक्त के ग्वालियर जोन के डायरेक्टर रहे केके मोहम्मद ने इन मंदिरों के जीर्णोद्वार में अहम भूमिका भी निभाई थी, लेकिन 2013 के बाद मंदिर के जीर्णोद्वार का काम रुका पड़ा है. इस इलाके में चल रहे अवैध खनन और चोरों के चलते गुप्त काल से लेकर गुर्जर काल के इन मंदिरों का अस्तित्व संकट में आ गया है.

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कौन हैं मोहर सिंह?

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डाकू मोहर सिंह साठ के दशक में बीहड़ों में आतंक का पर्याय रह चुके हैं. उनके ऊपर हत्या और लूट के करीब ढ़ाई सौ मुकदमे दर्ज थे और बीहड़ में उस वक्त डाकू मोहर सिंह के सिर पर दो लाख का ईनाम रखा गया था. लेकिन 1972 में जय प्रकाश नारायण के आह्वान पर डाकू मोहर सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया था. कई साल तक जेल में रहने के बाद आजकल मुरैना से कुछ दूर महगांव कस्बे में गुमनामी की जिंदगी बिता रहे हैं.

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