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मध्यप्रदेश : सीएम कमलनाथ का ऐलान, आदिवासियों का साहूकारों से लिया गया कर्ज माफ होगा

छिंदवाड़ा में अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने की घोषणा

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मध्यप्रदेश : सीएम कमलनाथ का ऐलान, आदिवासियों का साहूकारों से लिया गया कर्ज माफ होगा

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ (फाइल फोटो).

भोपाल:

किसानों के दो लाख कर्ज़माफी के ऐलान के बाद विश्व आदिवासी दिवस के दिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ऐलान किया है कि राज्य में जिन आदिवासियों ने साहूकारों से कर्ज लिया है वह माफ किया जाएगा. छिंदवाड़ा में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में कमलनाथ ने कहा कि इसके लिए सभी औपचारिक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं. 15 अगस्त, 2019 तक ये प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.

उन्होंने कहा सभी आदिवासी विकासखंडो में आदिवासियों ने जो साहूकारों से कर्ज़ लिया है, वह सभी क़र्ज़ माफ़ होंगे. आदिवासियों को कार्ड देंगे, जिससे वे 10 हज़ार तक ज़रूरत पढ़ने पर निकाल सकेंगे. साहूकारों के पास आदिवासियों के गिरवी जमीन, जेवर व समान लौटाना होंगे. अब जनजातीय कार्य विभाग अब आदिवासी विकास विभाग होगा. आदिवासी क्षेत्रों में 7 नए खेल परिसर खोले जाएंगे. आदिवासी परिवार में जन्म लेने पर 50 क्विंटल अनाज मिलेगा. 40 नए एकलव्य स्कूल खोले जाएंगे.हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि केवल उन्हीं साहूकार जिनके पास धन उधार देने के लिए उचित लाइसेंस है, उन्हें भविष्य में आदिवासियों को पैसा उधार देने की अनुमति दी जाए.

कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने कृषि ऋण माफी के वादे के आधार पर सत्ता में वापस आने के सात महीने बाद साहूकारों से उधार लिए गए आदिवासियों के ऋण माफ करने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को एक और ऐलान किया कि परिवार के सदस्य की मृत्यु की स्थिति में, प्रत्येक आदिवासी परिवार को 100 किलो चावल और घी मिलेगा.


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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, आदिम जाति कल्याण मंत्री ओंकार सिंह मरकाम ने राज्य में आदिवासी बच्चों के लिए 40 नए एकलव्य स्कूल स्थापित करने, 53,000 आदिवासी शिक्षकों को नियमित करने और वन गांवों को राजस्व गांवों में परिवर्तित करने सहित कई और घोषणाओं की .

यह ऐलान सियासी तौर पर भी अहम है क्योंकि राज्य में लगभग 20% आबादी आदिवासियों की है. छिंदवाड़ा में कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद, मुख्यमंत्री झाबुआ पहुंचे. झाबुआ भी इसलिये अहम है क्योंकि आदिवासी बहुल इस सीट पर कुछ महीनों में उपचुनाव होना है जिसे हाल में बीजेपी ने कांग्रेस से झटक लिया था.



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