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मध्य प्रदेश: अस्पताल प्रशासन की लापरवाही, नसबंदी के बाद महिलाओं को जमीन पर लिटाया गया

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अस्पताल प्रशासन की असंवेदनशीलता एक बार फिर से देखने को मिली है. जिले के सरकारी अस्पताल में महिलाओं की जिंदगी के साथ किस तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है, इसकी बानगी है ये खबर.

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मध्य प्रदेश: अस्पताल प्रशासन की लापरवाही, नसबंदी के बाद महिलाओं को जमीन पर लिटाया गया

मुरैना में अस्पताल के बाहर जमीन पर लेटने को मजबूर महिलाएं.

खास बातें

  1. मध्यप्रदेश के मुरैना में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अस्पताल की असंवेदनशील
  2. करीब 4 दर्जन महिलाओं को नसबंदी के बाद जमीन पर लिटाया गया.
  3. बेड की कमी की वजह से जमीन पर सोने को मजबूर महिलाएं.
भोपाल: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अस्पताल प्रशासन की असंवेदनशीलता एक बार फिर से देखने को मिली है. जिले के सरकारी अस्पताल में महिलाओं की जिंदगी के साथ किस तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है, इसकी बानगी है ये खबर. दरअसल, गांव की लगभग 4 दर्जन महिलायें मंगलवार सुबह ऑपरेशन (नसबंदी) के लिये आई थीं. मगर उन सभी को ऑपरेशन के बाद सुरक्षित जगह रखने की बजाए जमीन पर ही लिटा दिया गया. 

ऑपरेशन करवाने आईं महिलाओं को नसबंदी ऑपरेशन के बाद बेड के बदले जमीन पर लिटाया गया. उससे भी चिंता की बात ये है कि उन्हें न तो जमीन पर बिछाने के लिये कपड़े दिये गये और न ही उन्हें ओढ़ने के लिये कोई चादर ही दी गई. 

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अपनी रिश्तेदार को अस्पताल लेकर आईं रानी बघेल ने कहा कि वे यहां एल.टी.टी. केस लेकर आई हैं. ऑपरेशन के बाद सभी को बाहर जमीन पर लिटाया गया है. सभी अपने-अपने ओढ़ने बिछाने के कपड़े साथ लाये हैं. वही उपयोग कर रहे हैं. हालांकि, मीडिया में ये बात आने के बाद से अफरा-तफरी मची हुई है. 

मरीज के परिजन रामअवतार ने कहा कि आप ही देखें व्यवस्थाएं क्या हैं, गंदगी बहुत ज्यादा हैं. हम अकेले क्या कर सकते हैं. 50 मरीज हैं, सभी को बाहर डाल दिया है. प्रशासन की कोई व्यवस्था नहीं है. स्थानीय विधायक स्वास्थ्य मंत्री हैं फिर भी व्यवस्था नहीं हैं. बता दें कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इसी इलाके से आते हैं.

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प्रशासन का कहना है कि जैसे ही बेड खाली हुईं, मरीजों को अस्पताल में बेड पर लिटा दिया गया. सिविल सर्जन ए के सक्सेना ने कहा कि नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर इसलिए लिटाया गया है, क्योंकि पलंग खाली नहीं थे. अब पलंग खाली करवाकर उन पर सभी को शिफ्ट किया जा रहा है.
 
बता दें कि मध्यप्रदेश की लगभग 7 करोड़ की आबादी में 15000 डॉक्टरों की जरूरत है. स्वीकृत पद इसके आधे यानी लगभग 7000 हैं जबकि काम करने वालों की संख्या इसकी भी आधी है. ऐसे में आप सोच सकते हैं कि स्वास्थ्य सरकारी प्राथमिकताओं में कहां है.

VIDEO: अस्पताल में लापरवाही, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं


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