किसानों ने शुरू किया ऑनलाइन सत्याग्रह, नाराज होकर बोले- रेट पहले अच्छे थे, लेकिन अब तो मिट्टी के मोल बेचना पड़ेगा...

कोरोनावायरस (Coronavirus) काल में नेता डिजिटल हो रहे हैं, तो अब अपनी मांगों के लिए किसानों ने भी ऑनलाइन सत्याग्रह शुरू किया है.

खास बातें

  • किसानों ने भी शुरू किया ऑनलाइन सत्याग्रह
  • मध्यप्रदेश में सिवनी जिले के किसानों ने मक्के के समर्थन मूल्य के लिये
  • किसानों को 850-950 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा
भोपाल:

कोरोनावायरस (Coronavirus) काल में नेता डिजिटल हो रहे हैं, तो अब अपनी मांगों के लिए किसानों ने भी ऑनलाइन सत्याग्रह शुरू किया है. मध्यप्रदेश में सिवनी जिले के किसानों ने मक्के के समर्थन मूल्य के लिये किसान ऑनलाइन सत्याग्रह शुरु किया है. देशभर से कई किसान इस मुहीम में और मांग के साथ जुड़ते जा रहे हैं. युवा किसानों के अपनी तरह के इस पहले ऑनलाइन आंदोलन का फौरी उद्देश्य मक्का का समर्थन मूल्य बढ़वाना नहीं, मक्का का समर्थन मूल्य पाना है.

सिवनी मंडी में ये मक्का 959 रुपए क्विंटल में बिक गया, कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेस के मुताबिक एक क्विंटल मक्का पैदा करने की लागत 1,213 रुपए आती है. अभी इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,850 रुपये है. लेकिन अभी मध्यप्रदेश में मक्का 900-1000 रुपए क्विंटल बिक रहा है. यानी किसानों को 850-950 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा, एक एकड़ मक्के की लागत 14-16000 रुपए आती है.

सिवनी के किसान गोपाल बघेल मंडी की तरफ मक्का लेकर जा रहे थे, नाराज़ होकर कहते हैं मक्का बेचने जा रहा हूं, रेट पहले अच्छे थे 2000, अब 1000 मिट्टी का मोल तो बेचना पड़ेगा. वहीं मुकेश बघेल ने कहा जैसे तैसे सरकार खरीद रही है रेट नहीं मिल रहे हैं, पहले 2000 खरीदा अब 700-800 रु.प्रति क्विंटल मिल रहा है. बोनी का वक्त आ गया गेंहू भी नहीं बिका है. मक्का कम से कम 1700-1800 रु. प्रति क्विंटल बिकना चाहिये.

दिसंबर और जनवरी तक मक्के के दाम 2100-2200 प्रति क्विंटल तक थे, लेकिन विदेश से आयात शुरू होने पर मक्के के भाव गिरते गये. सिवनी के युवा किसान विजय बघेल कहते हैं, अभी मंडी में खरीफ का मक्का 40-50 प्रतिशत है, दिसंबर तक अच्छे रेट थे लेकिन अचानक बाहर से आयात किया तो रेट गिरते गये, कोविड-19 में 900-1000 प्रति क्विंटल हो गये हैं.

मक्का किसानों को हो रहे घाटे से परेशान होकर युवा किसानों ने विरोध का नया तरीका निकाला ऑनलाइन सत्याग्रह, किसान सत्याग्रह का फेसबुक पेज बना, ट्विटर में भी इसी नाम से दस्तक दी गई. सामाजिक कार्यकर्ता गौरव जायसवाल ने कहा ये एक ऑनलाइन किसान आंदोलन है, जिसे सिवनी जिले के युवा किसानों ने शुरू किया है, सबकी मांग है कि सरकार एमएसपी पर किसानों का मक्का खरीदे.

इस आंदोलन का तरीका अनोखा है- पहला प्ले कार्ड के माध्यम से किसान अपना समर्थन जता रहे हैं, दूसरा अपना वीडियो बनाकर अपनी परेशानी और मांग बता रहे हैं. तीसरा किसान सत्याग्रह के समर्थन में व्हाट्सऐप में अपनी डीपी लगा रहे हैं.

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मंत्रीजी ने किसानों को कोई भरोसा तो नहीं दिया, बस दुर्भाग्य पर रोते दिखे. मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा मक्का अपने यहां होता नहीं थी, लेकिन किसानों ने ये बात सही कही है कि व्यापारी भाव गिरा देते हैं यही दुर्भाग्य है, किसानों से दिन रात बात करता हूं, इस मामले में भी करेंगे.

मध्यप्रदेश में चंद महीने पहले ही पिछली सरकार कॉर्न फेस्टिवल के जरिये किसानों को बड़े सपने दिखाकर गई थी, जिसमें नई सरकार खरीदी तक से बचती दिख रही है. ये सच है कि मध्य प्रदेश मक्के का बड़ा उत्पादक नहीं है, लेकिन सिवनी, छिंदवाड़ा जैसे जिलों में मक्का उपजता है अकेले सिवनी में लगभग 4 लाख 35 हजार एकड़ में मक्के की बोनी हुई थी, यानी करोड़ों का नुकसान.