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मध्यप्रदेश सरकार की भावांतर योजना किसानों के लिए 'भंवर' बनी

न्यूनतम समर्थन मूल्य सिर्फ कहने के लिए, मंडियों में व्यापारी MSP से काफी कम कीमत पर कर रहे अनाज की खरीदारी

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मध्यप्रदेश सरकार की भावांतर योजना किसानों के लिए 'भंवर' बनी

मध्यप्रदेश सरकार की भावांतर भुगतान योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा.

खास बातें

  1. फसलों के लिए भावांतर के तहत किसानों का भुगतान लटका
  2. मंडी में किसान को हर फसल का मूल्य एमएसपी से कम मिल रहा
  3. कांग्रेस ने कहा- झूठी सरकार, ठगने वाली सरकार
भोपाल:

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद को किसानों का सबसे बड़ा हमदर्द बताते हैं. उनके नेतृत्व में दाल उत्पादन में अगुआ मध्यप्रदेश गेंहू में भी रिकॉर्ड बनाने लगा. प्रदेश साल दर साल कृषि कर्मण अवॉर्ड जीतता गया. वह राज्य जहां 70 फीसदी आबादी खेती या उससे जुड़े जरियों से रोज़ी कमाती है. लेकिन यह वह राज्य भी है जो किसानों की खुदकुशी के मामले में तीसरे नंबर पर है. जहां किसानों की नाराज़गी हिंसक हुई, 6 किसान पुलिस की गोली से मरे. जहां राज्य सरकार किसानों के लिए भावांतर की सौगात लाई, लेकिन इसे किसान भंवर समझ रहे हैं.
    
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अलावा मध्यप्रदेश सरकार को लगता है कि भावांतर भुगतान योजना से उसे चुनावी साल में फायदा होगा, 3399 रुपये सोयाबीन का समर्थन मूल्य है. सरकार फ्लैट 500 रुपये क्विंटल दे रही है, यानी 3900 के आसपास. किसानों की शिकायत है कि जब भावांतर नहीं था तो सोयाबीन कई बार 5000 बिकता था.

27 साल के सचिन मीणा बड़वाई से भोपाल की करौंद मंडी 50 क्विंटल सोयाबीन लेकर पहुंचे. फसल बिकी 2820 प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य से 579 रुपये कम. सरकार ने हाल ही में सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3050 से बढ़ाकर 3399 किया यानी 349 रुपये की बढ़ोतरी की. इसके बावजूद चाहे उड़द हो, मूंग, या फिर बाजरा मंडी में किसान को हर फसल का मूल्य एमएसपी से कम मिल रहा है. किसानों की शिकायत है कि अच्छी से अच्छी फसल को व्यापारी 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक कम में खरीद रहा है.

 
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मध्यप्रदेश सरकार ने खरीफ के लिए सोयाबीन पर भावांतर भुगतान में मॉडल रेट के बजाए 500 रुपये क्विंटल देने का ऐलान किया, लेकिन भरत सिंह मीणा जैसे किसानों का कहना है कि उन्हें कम से कम सरकार भुगतान की तारीख बता दें, 15 दिन... 30 दिन.. कम से कम तारीख तो बता दें.

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सरकार का जवाब किसानों की परेशानी बढ़ाने वाला है. वह खुद मानती है कि आचार संहिता के दो दिन पहले किए गए ऐलान का नतीजों तक कोई मतलब नहीं. वहीं कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी हर वक्त किसानों को ठगती है.
      
बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा हमने उन्हें 33000 करोड़ सीधे खाते में दिए. बिल्कुल इससे किसानों पर वज्रपात हुआ है. लेकिन जैसे ही चुनाव ख़त्म होंगे हम सत्ता में लौटेंगे. इसे हर्जाने के साथ किसानों को अदा किया जाएगा. वहीं कांग्रेस की शोभा ओझा का कहना था ये झूठी सरकार है, ठगने वाली सरकार है. जो मजाक किसानों के साथ किया है उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते. यही कारण है कि यहां 17000 किसानों ने आत्महत्या की है.

VIDEO : भावांतर योजना व्यापारियों की जेब में   
   
बहरहाल किसान सरकार से खुश हैं या नाराज, इसका फैसला तो 28 नवंबर को हो जाएगा. एमएसपी पर सरकार को भुगतान के लिए 4,450 करोड़ रुपये चुकाने हैं, जिसका भार नई सरकार पर होगा. उस सरकार पर जिसे खाली खजाना तो मिलेगा ही कर्ज का बोझ 1,87,636 .39 करोड़ का होगा.


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