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उफनती नदी में ट्यूब पर बैठकर जान जोखिम में डालने वालों की नैया कौन लगाएगा पार?

केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुना में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस वे सहित कुल 5000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का ऐलान किया

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उफनती नदी में ट्यूब पर बैठकर जान जोखिम में डालने वालों की नैया कौन लगाएगा पार?

गुना जिले में पार्वती नदी के तेज बहाव में जोखिम उठाकर ट्यूब की बनी नाव में सफर करते हुए लोग.

खास बातें

  1. गुना के बमौरी तहसील के लोगों को पार्वती नदी पर एक पुलिया की दरकार
  2. उफनती नदी में ट्यूब पर बैठकर पार करके राजस्थान जाते हैं लोग
  3. पुलिया न बनने के लिए बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे को ठहरा रहे जिम्मेदार
भोपाल: केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 23 जुलाई को मध्यप्रदेश के गुना में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस वे, चंबल एक्सप्रेस वे तथा भोपाल-इन्दौर नया एक्सप्रेस वे बनाने जैसी तीन परियोजनाओं की घोषणा की. कुल 5000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का ऐलान हुआ. इस कार्यक्रम में मंच से कांग्रेस विधायक को सुरक्षाकर्मियों ने धक्के मारकर उतार दिया. इसके अलावा स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को आमंत्रण इसका नहीं दिया गया. इसे लेकर उन्होंने विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दिया है. इन सब सियासी बातों और हजारों करोड़ की घोषणाओं के बीच गुना में बमौरी तहसील के गांव वाले पार्वती नदी पर एक पुलिया की आस में बैठे रहे.

मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा पर बसे इन गांवों के बीच पार्वती नदी हर बरसात में गांव वालों को परेशान करती है. परिवार को पालने, दो रोटी कमाने हर रोज बमौरी तहसील से उफनती नदी में ट्यूब पर बैठकर पार करते हुए राजस्थान के शहरों की तरफ जाते हैं. आसपास कभी डॉक्टर न मिले तो गांव वाले बच्चों और महिलाओं को भी ऐसे ही नदी पार कराते हैं.

मज़दूरी करने राजस्थान के छाबड़ा जा रहे मुकेश कश्यप ने कहा मज़दूरी के लिए रोज जाते हैं, बच्चे पढ़ने जाते हैं, डोंगर में बैठना पड़ता है. गुना दूर पड़ता है. ट्यूब वाला पार कराने के 50 रुपये लेता है. वहीं रामस्वरूप ने कहा 21 वीं सदी के भारत में हम इतने पीछे हैं कि सिर पर पोटली रखकर हाट बाजार के लिए छबड़ा जाना पड़ता है. महिलाओं को बहुत परेशानी होती है. आठ-दस दिन पहले एक ट्यूब पलट गया था.
       
पुल बनाने के लिए सरकार ने कुछ नहीं सोचा, लेकिन हादसे हो जाएं तो डूबते को बचाने के लिए जवानों की ड्यूटी जरूर लगा दी है. पार्वती नदी के किनारे डूबने वालों को बचाने के लिए खड़े होमगार्ड के जवान रमेश विश्वकर्मा ने कहा वर्तमान में दो लोग हैं, 24 घंटे की ड्यूटी है. जब हमने पूछा कि वे लोगों को ट्यूब में बैठने से रोकते क्यों नहीं, तो उन्होंने बताया गांव वाले कहते हैं हमारी इमरजेंसी है. राजस्थान के छाबड़ा इलाज कराने जाते हैं ... क्या करें छोड़ना पड़ता है.
        
दोनों राज्यों समेत केन्द्र में बीजेपी का शासन है, फिर भी उसे जवाब कांग्रेस से चाहिए. उधर सालों तक पुल क्यों नहीं बना इसके जवाब में कांग्रेस के सवाल सत्ताधारी दल से हैं. बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने कहा मध्यप्रदेश की सरकार ने विकास को गलियों तक, नालियों तक पहुंचा दिया तो पुलिया बड़ी बात नहीं है. हम तो वनवासियों के साड़ी चप्पल तक की चिंता करते हैं. कोई तकनीकी मामला रहा होगा जिसको लेकर देरी हो रही होगी. लेकिन गुना से प्रतिनिधित्व करने वाले सिंधिया जी और दिग्विजय जी को भी जवाब देना चाहिए. वहीं कांग्रेस के फिरोज़ सिद्धीकी का कहना था कि अभी हाल में गडकरी जी ने 5000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए नारियल फोड़ा है. इसके लिए कमलनाथ जी ने भूतल परिवहन मंत्री रहते हुए 25000 करोड़ दिए थे. उन्होंने दूसरे की योजना पर अपना नारियल फोड़ दिया. ये जो पुलिया की बात है, लोग परेशान हैं. गुना में इसके लिए शिवराज सरकार ज़िम्मेदार हैं सांसद नहीं.  

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VIDEO : पार्वती नदी पर पुल बनने की आस

बहरहाल सत्ता और विपक्ष की तकरार के बीच हर बरसात में तकरीबन दो दर्जन गांवों के लोग हर रोज ऐसे ही जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं.


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