छत्तीसगढ़ : रायपुर में मुख्यमंत्री निवास के सामने एक युवक ने खुद को लगाई आग, गंभीर रूप से झुलसा

यह युवक मुख्यमंत्री से मिलने सीएम हाउस पहुंचा था लेकिन उसे मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया गया. इसी वजह से उसने ये आत्मघाती कदम उठा लिया.

छत्तीसगढ़ : रायपुर में मुख्यमंत्री निवास के सामने एक युवक ने खुद को लगाई आग, गंभीर रूप से झुलसा

यह युवक मुख्यमंत्री से मिलने सीएम हाउस पहुंचा था

भोपाल:

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सरकारी निवास के सामने एक युवक ने आत्मदाह करने की कोशिश की. 50 फीसद से ज्यादा झुलसे 27 साल के हरदेव सिन्हा को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है. रायपुर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पकंज चंद्रा ने सोमवार को यहां बताया कि धमतरी जिले के हरदेव सिन्हा ने आज सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में स्थित मुख्यमंत्री निवास के सामने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली. वहां मौजूद सुरक्षा बल के जवान वहां तत्काल पहुंचे और उन्होंने आग बुझायी. युवक को रायपुर के डाक्टर भीमराव आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में कहा है कि किसी को भी भावावेश में आकर ऐसा नकारात्मक कदम नहीं उठाना चाहिए. राज्य सरकार ने कोरोना संकट के इस काल में भी पूरे राज्य में रोजगार देने की व्यवस्था की है. मुख्यमंत्री ने घायल हरदेव सिन्हा के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. प्रशासन का कहना है कि हरदेव अपने घर में माता-पिता और तीन भाई के साथ रहता है. पत्नी मजदूरी का काम करती है और उसकी दो बेटियां हैं जिनकी उम्र 6 वर्ष और 3 वर्ष हैं.

हरदेव का छोटा भाई भी मानसिक रूप से अस्वस्थ है जिसने विवाह नहीं किया है और घर पर ही रहता है. बड़े भाई धमतरी के गैरेज में काम करते हैं और पिता बुजुर्गं होने के कारण घर पर ही रहते हैं. हरदेव सिन्हा की गांव में दो एकड़ कृषि भूमि है, उसने नवीं तक पढ़ाई की है, रोजगार गारंटी योजना में उसके नाम पर जॉब कार्ड है और पिछले महीने उसने 11 दिन का काम भी किया है. उसके परिवार के लोगों ने 21 दिन काम किए हैं.

हरदेव सिन्हा ने तेलीनसत्ती गांव में यूट्यूब में पिक्चर बनाने की अनुमति का भी आवेदन दिया था. पिता प्यारीलाल सिन्हा कहते हैं, 'जाने से पहले कुछ नहीं बताया, कल चावल नहीं था घर में, बहू ने मांगा था बस. पड़ोसी के घर से मांग कर लाये थे 5-6 किलो. रात में खाना नहीं खाया, सुबह भी नहीं खाया. कहां गया, क्यों गया इसकी जानकारी मुझे नहीं थी.' पत्नी भी प्रशासन की बातों को नकारती हैं,

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उन्होंने कहा, 'गरीबी की स्थिति थी, मैंने कहा कि चावल नहीं है, सुबह उठे चाय पीकर निकले, मुझे लगा मजदूरी करने जा रहे हैं. नहीं उन्हें कोई दिमागी बीमारी नहीं थी सिर्फ परेशान थे कि पैसा नहीं है तो कहां से खर्च करें.'

वहीं बीजेपी ने इस मामले में सरकार पर हमला किया. बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु देव साय ने कहा कि जब सत्ताधारी कांग्रेस अपने अध्यक्ष के कार्यकाल का एक वर्ष पूरे होने का जश्न मना रही थी, उसी समय सीएम हाउस के बाहर ही ऐसी घटना होना कांग्रेस सरकार की पोल खोलता है. दस लाख युवाओं को नौकरी और बेरोज़गार युवाओं को बेरोज़गारी भत्ता देने का प्रपंच रच कर सत्ता में आयी सरकार ने किस तरह युवाओं को ठगा है, उनकी भावनाओं से खिलवाड़ किया है, यह दुखद घटना उसी का प्रकटीकरण है. बेरोज़गारी से त्रस्त युवक अब आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं.