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मंदसौर रेप केस: इरफान और आसिफ को फांसी की सजा, कोर्ट ने 56 दिन में सुनाया फैसला

इस मामले में 15 सेकेंड के सीसीटीवी फुटेज के सहारे पुलिस ने वारदात को लगभग 24 घंटे के भीतर ही सुलझा लिया था और एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था.

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मंदसौर रेप केस: इरफान और आसिफ को फांसी की सजा, कोर्ट ने 56 दिन में सुनाया फैसला

मंदसौर रेप केस: इरफान और आसिफ को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा

खास बातें

  1. मामले में 10 जुलाई को आरोप पत्र दाखिल किया था
  2. पूरे मध्यप्रदेश में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किये थे
  3. 15 सेकेंड के सीसीटीवी फुटेज से मिले थे अहम सुराग
भोपाल : मध्य प्रदेश के मंदसौर में 8 साल की बच्ची के रेप के मामले में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया है. अदालत ने दोनों ही आरोपियों को इस मामले में मौत की सजा सुनाई है. मामला 26 जून का है जब इरफान और आसिफ नाम के दो लोगों ने स्कूल से बच्ची का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया था और उसकी हत्या की कोशिश भी की थी. कोर्ट ने इस मामले में मात्र 56 दिनों में ट्रायल पूरा कर आरोपियों की सजा सुनाई है. विशेष न्यायालय की न्यायाधीश निशा गुप्ता ने आठ वर्षीय स्कूली छात्रा का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार करने के मामले में इरफान ऊर्फ भैयू (20) एवं आसिफ (24) को संबंधित धाराओं में दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है. लोक अभियोजक बी एस ठाकुर ने बताया कि अदालत ने हाल ही में शुरू किये गये भादंवि की धारा 376 डीबी के तहत दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. इस धारा के तहत 12 वर्ष से कम साल की बच्ची से सामूहिक बलात्कार करने पर मृत्युदंड की सजा का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि मंदसौर में इस आठ वर्षीय बच्ची को 26 जून की शाम लड्डू खिलाने का लालच देकर उस वक्त अगवा किया गया था जब वह स्कूल की छुट्टी के बाद पैदल अपने घर जा रही थी. सामूहिक बलात्कार के बाद कक्षा तीन की इस छात्रा को जान से मारने की नीयत से उस पर चाकू से हमला भी किया गया था. वह 27 जून की सुबह शहर के बस स्टैंड के पास झाड़ियों में लहूलुहान हालत में मिली थी.

इस मामले में पुलिस ने इरफान एवं आसिफ को गिरफ्तार किया था. ठाकुर ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने दोनों आरोपियों पर भादंवि की धारा 376-डी (सामूहिक बलात्कार), 376 (2एन), 366 (अपहरण), 363 (अपहरण के दण्ड) एवं पॉक्सो एक्ट से संबधित धाराओं के तहत 10 जुलाई को आरोप पत्र दाखिल किया था. घटना के मात्र 15वें दिन दाखिल किये गये इस आरोप पत्र में 350 से अधिक पेज एवं प्रमाण के लिए करीब 100 दस्तावेज थे. इसमें डॉक्टरों सहित 92 गवाहों के बयान भी दर्ज थे. इसके अलावा, इस आरोप पत्र के साथ अदालत में 50 चीजें भी पेश की गई हैं, जिनमें आरोपियों इरफान एवं आसिफ द्वारा बच्ची को जान से मारने की नीयत से उस पर हमला करने वाले चाकू एवं कपड़े भी शामिल थे. इस अमानवीय घटना के बाद मंदसौर सहित पूरे मध्यप्रदेश में आरोपियों को तुरंत फांसी देने की मांग करते हुए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किये थे.

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पुलिस को 27 जून दोपहर लक्ष्मण दरवाजा के पास से बच्‍ची घायल हालात में मिली थी. इसके बाद पुलिस ने सुराग तलाशने के लिए वहां की सीसीटीवी खंगाले लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. पुलिस ने फिर सोशल मीडिया के जरिए लोगों से मदद मांगी. शहर में कई ऐसे लोग थे जिन्होंने अपने-अपने फ़ुटेज जाकर पुलिस कंट्रोल रूम में सौंपे.

आसान नहीं था आरोपियों तक पहुंचना...
मंदसौर रेप मामले में बमुश्किल 15 सेकेंड के सीसीटीवी फुटेज के सहारे पुलिस ने घटना के लगभग 24 घंटे बाद पहले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन ये इतना आसान नहीं था क्योंकि स्कूल का सीसीटीवी कैमरा ख़राब पड़ा था और गेट के पास पर लगा सीसीटीवी कैमरा ख़राब होने के अलावा ग़लत दिशा में भी था. मंदसौर के पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने बताया सबसे पहले हमने इरफान को गिरफ्तार किया. आगे पूछताछ में आसिफ को पकड़ा, अभी तक की जांच में दोनों की भूमिका पाई गई है. इस गिरफ्तारी के पीछे सीसीटीवी फुटेज में आरोपी का चेहरा नहीं बल्कि दो अहम सुरागों की भूमिका सबसे ज्यादा रही वो थे आरोपी के जूते और हाथ में बंधा काला धागा. पुलिस गुत्थी शायद पहली सुलझा लेती अगर बच्ची के पिता ने वक्त पर थाने में रिपोर्ट लिखवाई होती. पहले तो परिजनों ने स्कूल पहुंचने में देरी की, स्कूल को देरी के बारे में जानकारी नहीं दी फिर स्कूल की छुट्टी के तीन घंटे बाद उसके पिता ने थाने में रिपोर्ट लिखवाई.

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जेल प्रशासन ने आरोपियों को रखने से कर दिया था इनकार
साल की बच्ची से रेप के आरोपियों इरफान और आसिफ को जेल प्रशासन ने रखने से इनकार कर दिया था. जेल प्रशासन का कहना था कि रेप के आरोपियों के प्रति पहले से जेल में सज़ा काट रहे कैदियों में भरपूर गुस्सा है, और उन्हें जेल में रखने से उन्हें जान से मार दिए जाने का खतरा पैदा हो जाएगा. जेल प्रशासन के मुताबिक, जेल में किसी अलग सेल की व्यवस्था नहीं होने की वजह से उन्हें यहां सुरक्षित रखना मुमकिन नहीं हो पाएगा. जेल अधिकारियों ने बताया था कि उन्होंने कोर्ट से खत लिखकर अनुरोध किया है कि अगर इन आरोपियों को जेल भेजा जाना जरूरी है तो इन्हें केंद्रीय जेल भेज जाए क्योंकि इन्हें हमारे पास रखने के लिये अलग सेल नहीं है.

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