पीएम मोदी के ऐलान बड़े, पंचायती राज में पिछड़ रहा मध्यप्रदेश

मनरेगा में लोकपाल की नियुक्ति का मामला हो या फिर भुगतान का, मध्यप्रदेश का मजदूर-किसान परेशान है

पीएम मोदी के ऐलान बड़े, पंचायती राज में पिछड़ रहा मध्यप्रदेश

पीएम नरेंद्र मोदी.

खास बातें

  • मनरेगा कानून के तहत 320 शिकायतों में से 230 लंबित
  • लोकपालों की नियुक्ति आधे से भी कम ज़िलों में हुई
  • मजदूरों को 450 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया
भोपाल:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के दिन मध्यप्रदेश में मंडला से 2.44 लाख पंचायतों को सीधे संबोधित किया. गांव के विकास के लिए तीन धन की बात की लेकिन जिस प्रदेश से उन्होंने लंबे चौड़े ऐलान किया वो पंचायती राज व्यवस्था में पिछड़ता जा रहा है. मनरेगा में लोकपाल की नियुक्ति का मामला हो या फिर भुगतान का मध्यप्रदेश का मजदूर किसान परेशान है.
        
मध्यप्रदेश में मनरेगा कानून के 320 शिकायतों में  230 लंबित हैं क्योंकि राज्य के 51 ज़िलों में मनरेगा एक्ट के तहत अनिवार्य लोकपालों की नियुक्ति आधे से भी कम ज़िलों में हुई है. विपक्ष का आरोप है, सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था को खत्म कर दिया है. दिग्विजय सिंह ने तो केन्द्र को खत लिखकर कहा है कि मनरेगा कार्यों में करने वालों मजदूरों के 450 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है.
       
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा आधे से ज्यादा जगहों पर लोकपाल का प्रावधान किया नहीं है, मनरेगा के मजदूरों को मजदूरी मिल नहीं रही है सिर्फ सरकारी तंत्र मंत्र से काम हो रहा है पंचायती राज संस्थाओं को खत्म कर दिया है, सरकार का काम सिर्फ आयोजन भर है.
      
ये सब तब जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह मनरेगा की साधारण सभा के अध्यक्ष हैं, विपक्ष का आरोप है पिछले 4 साल में सभा की एक भी बैठक नहीं हुई है. कांग्रेस के आरटीआई सेल के अध्यक्ष अजय दुबे का आरोप है कि मनरेगा में वृक्षारोपण नर्मदा बेसिन में करवाया गया वो बड़ा घोटाला हुआ, पलायन बुंदेलखंड से नहीं रूक पाया जो लोकपाल को निष्क्रिय करने से हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री साधारण सभा के मुख्य सचिव संचालक मंडल के अध्यक्ष है, यदि मनरेगा पर सरकार पर गंभीर नहीं तो कल ऐलान का कोई मतलब नहीं.
     
लेकिन सरकार कह रही है, उसने 20 अप्रैल तक सारा भुगतान कर दिया है, लोकपाल संभाग स्तर पर नियुक्त किये हैं, ताकी सरकारी खजाने पर कम बोझ पड़े. पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री विश्वास सारंग ने कहा  हमने प्रशासकीय व्यय के लिये 2000 करोड़ रू की मांग की थी वो हमारे पास आ गये, मजदूरी के 915 करोड़ आ गये ... विपक्ष किन तथ्यों के आधार पर ये इल्जाम लगा रहा है. प्रशासकीय व्यय भी बहुत बढ़ जाता है, हमने आदर्श स्थिति बनाने की कोशिश की है ताकि एक लोकपाल 2-3 जिले में जांच की व्यवस्था करे.
         
हमने आपको मध्यप्रदेश में मनरेगा से बेहाल किसानों की दुर्दशा की तस्वीरें लगातार दिखाई हैं, पिछले साल राज्य ने केन्द्र से बकाया पैसों के लिये गुहार लगाई थी. ये और बात है कि संसद में मनरेगा को यूपीए की विफलताओं का स्मारक कहने वाले प्रधानमंत्री ने मंडाल में इसे अहम बताते हुए कहा कि मनरेगा के लिए राशि का इन्तजार करने से पहले सरकार योजना बनाये फिर पैसा आये तो उसे खर्च करें, भाषण में जोड़ा कमी पैसों की नहीं सोच की है.. अब सरकार के पास पैसे कम हैं या सोच ये शिवराज ही जानें.

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