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मध्यप्रदेश के विधायकों को लैपटॉप के बाद क्षेत्र में बंगला, दो सहायक और हाईटेक फोन भी चाहिए!

मध्यप्रदेश पर 1,82,917 करोड़ रुपये का कर्ज, 229 सदस्यों वाली विधानसभा के गैजेट प्रेमी विधायकों में से 69 फीसदी 12वीं या इससे कम शिक्षा प्राप्त

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खास बातें

  1. दो करोड़ की विधायक निधि और स्वेच्छानुदान को दोगुना करने की मांग
  2. दोनों दलों के विधायकों की मांग, जरूर निर्णय लिया जाएगा : कांग्रेस
  3. जिस जनता से वे चुनकर आते हैं, वहां संदेश ठीक नहीं जाएगा : बीजेपी
भोपाल:

मध्यप्रदेश में खज़ाना भले ही खाली हो लेकिन विधायकों की डिमांड कम नहीं हो रही है. वर्तमान में मिल रहा वेतन भत्ता उन्हें कम लगने लगा है इसलिये अब उन्होंने अपने इलाके में भी बंगले, दफ्तर जैसी सुविधाओं की मांग शुरू कर दी है. मध्यप्रदेश की 14 वीं विधानसभा में विधायकों को 35,000 का लैपटॉप मिलना तय हुआ था, 15 वीं विधानसभा में इसे 50,000 रुपये कर दिया गया. 230 सदस्यों वाली विधानसभा में ऐसे 102 विधायकों को भी लैपटॉप मिलेगा जिन्हें लैपटॉप पहले मिल चुका है. इसके अलावा विधायकों के मकान और गाड़ी के लिए कर्ज़ की सीमा बढ़ गई है.

अब मध्यप्रदेश के विधानसभा सदस्य चाहते हैं क उन्हें अपने इलाके में बंगला, दफ्तर जैसी सुविधाएं भी मिलें. इसके अलावा दो करोड़ की विधायक निधि और स्वेच्छानुदान को दोगुना किया जाए, रेल यात्रा के लिए कूपन के बजाए सांसदों की तरह कार्ड मिले और सरकारी कामकाज के लिए एक नहीं, दो निजी सहायक मिलें.

पेटलावाद के कांग्रेस के विधायक वालसिंह मेड़ा ने कहा कि लैपटॉप की बात हुई. उसमें कहा सबको 50000 का लैपटॉप दूंगा जो सीएम साहब निर्णय करेंगे उसमें सहमत हैं. उन्होंने कहा कि हमको रेस्ट हाउस दे रखा है जिससे काम कर रहे हैं.


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कांग्रेस के प्रवक्ता सैय्यद हाफिज़ ने कहा कि विधायकों ने अपने क्षेत्र में मकान की मांग रखी है. यह दोनों दलों के विधायकों ने रखी है. उनको क्षेत्र में रहना ज्यादा जरूरी है. कुछ बातें कहेंगे जिससे उनके काम हो सकें. इस पर जरूर निर्णय लिया जाएगा, ऐसा कि खजाने पर असर न पड़े, जनता का फायदा भी हो जाए.

मांगें सर्वदलीय हैं लेकिन बीजेपी को लगता है कि समाज में इसका ठीक संदेश नहीं जाता. बीजेपी के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि एक बार जो नरेन्द्र मोदी ने कहा, इसका मैकेनिज्म तर्कसंगत होना चाहिए. इस प्रकार मध्यप्रदेश के विधायकों को विचार करना चाहिए क्योंकि समाज पर इसका प्रभाव ठीक नहीं है. जिस जनता से वे चुनकर आते हैं, वहां संदेश ठीक नहीं है.

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फिलहाल मध्यप्रदेश में विधायकों को 30,000 वेतन, 35,000 निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 10,000 टेलीफोन भत्ता, 10,000 रुपये डाक भत्ता, 15,000 रुपये कंप्यूटर ऑपरेटर भत्ता और 10,000 रुपये चिकित्सा भत्ता, यानी कुल 1,10,000 प्रतिमाह मिलते हैं. माननीयों को नए हाईटेक फोन भी चाहिए, ये सब तब जब राज्य पर 1,82,917 करोड़ रुपये का कर्ज है. और हां गैजेट प्रेमी नेताजी में मध्यप्रदेश में 229 सदस्यों वाली विधानसभा में 69 फीसदी विधायक ऐसे हैं जो, पांचवी, आठवीं, 10वीं और 12वीं पास हैं.

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वैसे डिमांड नए हाईटेक फोन की भी है. जनवरी से अगस्त के बीच मध्यप्रदेश सरकार लगभग 12000 करोड़ रुपये कर्ज उठा चुकी है. राज्य पर कर्जे का बोझ लगातार बढ़ रहा है लेकिन माननीयों की डिमांड कम नहीं हो रही है. खुद पर खर्चे की यह डिमांड सर्वदलीय है, जिस पर किसी को कोई ऐतराज नहीं है.

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