Coronavirus Lockdown: मंदिर आने वाले भालुओं को नहीं मिल रहा खाना, किसान ने भैंसों और बैलों को पहनाया मास्क

लॉकडाउन से न सिर्फ पालतू बल्कि जंगली जानवर भी प्रभावित हो रहे हैं. छत्तीसगढ़ में महासमुंद जिले के घुंचापाली पहाड़ी पर स्थित श्री चंडी माता मंदिर में कई वर्षों से जंगल से निकलकर कई भालू मंदिर परिसर में नियमित आते हैं.

Coronavirus Lockdown: मंदिर आने वाले भालुओं को नहीं मिल रहा खाना, किसान ने भैंसों और बैलों को पहनाया मास्क

लॉकडाउन की वजह से भालुओं को ठीक से भोजन नहीं मिल पा रहा है.

खास बातें

  • मंदिर आने वाले श्रद्धालु देते थे भालुओं को भोजन
  • भालू किसी भी श्रद्धालु को नहीं पहुंचाते नुकसान
  • किसान ने बचाव के लिए बैल-भैंसों को पहनाया मास्क
महासमुंद/सीहोर:

दुनियाभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) फैलता ही जा रहा है. इस बीमारी से हर कोई प्रभावित हो रहा है. संक्रमण से बचने के लिए कई देशों में लॉकडाउन लगाया गया है. भारत में भी 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की गई. राज्य सरकारें सख्ती से इसका पालन करवा रही हैं. लॉकडाउन से न सिर्फ पालतू बल्कि जंगली जानवर भी प्रभावित हो रहे हैं. छत्तीसगढ़ में महासमुंद जिले के घुंचापाली पहाड़ी पर स्थित श्री चंडी माता मंदिर में कई वर्षों से जंगल से निकलकर कई भालू मंदिर परिसर में नियमित आते हैं. श्रद्धालु अपने हाथ से इन भालुओं को खाना खिलाते हैं, आजतक इन्होंने कभी भी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया, लेकिन अब लॉकडाउन में मंदिर परिसर तक श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद है. पहाड़ पर बने रास्ते भी वीरान हैं. सिर्फ मंदिर के कर्मचारी ही वहां हैं, अब इन भालुओं का पेट फिर से प्रकृति के भरोसे ही पल रहा है.

श्री चंडी माता मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष लालचंद जैन कहते हैं, 'पहले श्रद्धालु आते थे, अभी लॉकडाउन जबसे हुआ है तबसे समस्या हो गई है. भालुओं के सामने खाने का संकट पैदा हो गया है.' मंदिर समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सिकंदर सिंह ठाकुर कहते हैं, 'मंदिर में भालू प्रतिदिन आते हैं, वो भी मायूस हैं. प्राकृतिक रूप से जो खाते हैं, उसी पर निर्भर रहते हैं. हम मंदिर में आने वाले भालुओं को रेवड़ी, फल्ली देते हैं. समिति देती है लेकिन वह फिर भी मायूस दिख रहे हैं.'

वहीं दूसरी ओर सीहोर जिले के चन्देरी गांव में किसान एमएस मेवाडा और उनके कुछ साथियों ने अपने बैल, भैसों को भी मास्क पहना दिए हैं. किसान इस वक्त गेहूं और चने की फसलों को काट रहे हैं. उन्हें बैलगाड़ियों से खेत से घर पर लाया जा रहा है. कोरोना में जानवरों के संक्रमण का वैसे तो मामला सामने नहीं आया है, लेकिन ये तस्वीर प्रतीकात्मक जरूर है. किसान एम एस मेवाडा कहते हैं, 'हम रोज जब खेत पर आते हैं, तो उन्हें मास्क लगाकर आते हैं. मास्क लगाकर ले जाते हैं. हम अपने घर परिवार को सुरक्षित रख ही रहे हैं.' बहरहाल कुछ बातों का वैज्ञानिक आधार तो नहीं होता, वह सिर्फ महसूस की जा सकती हैं. लॉकडाउन की शांति में चिड़िया की चहक तो आप सुन सकते हैं, लेकिन कई पशु-पक्षी भूखे हैं और एक जगह बंधकर शायद उदास भी.

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