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मंदसौर हिंसा के पीछे था अफीम तस्‍करों का हाथ, मध्‍य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में कहा

भार्गव ने कहा के पहले मंदसौर को देश में अफीम का केन्द्र समझा जाता था, लेकिन डोडा चूरा एवं अफीम पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार इसके अवैध व्यापार पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है, जिससे चलते तस्करों ने मंदसौर कांड किया.

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मंदसौर हिंसा के पीछे था अफीम तस्‍करों का हाथ, मध्‍य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में कहा

फाइल फोटो

खास बातें

  1. सदन के बाहर अफीम तस्करों और हिंसा पर गृहमंत्री उतने गरम नहीं थे
  2. गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा, व्यवस्था बनाए रखने फायरिंग करनी पड़ी थी
  3. कांग्रेस इस मुद्दे पर गृहमंत्री से लेकर सीएम तक का इस्तीफा चाहती है
भोपाल: मध्यप्रदेश सरकार ने मंगलवार को मानसून सत्र के दूसरे दिन विधानसभा में कहा कि मंदसौर में हिंसा के पीछे अफीम के तस्करों का हाथ था. सरकार ने ये भी स्वीकार किया कि हिंसा रोकने के लिये पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी जिसमें कुछ किसानों की मौत हुई. विपक्ष ने एक बार फिर इस मु्द्दे पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई है.

मंगलवार को कांग्रेस के स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि सरकार अफीम माफिया पर सख्त है और उसी से ध्यान भटकाने के लिए मंदसौर में हिंसक साजिश रची गई.

कांग्रेस विधायक गोविन्द सिंह सहित 47 सदस्यों द्वारा प्रदेश में हो रही किसानों की दुर्दशा एवं मंदसौर में छह जून को निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस गोलीबारी के मामले में स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा, ‘‘डोडा चूरा एवं अफीम पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है. इस पर पुलिस एवं राज्य सरकार की सख्ती के कारण अफीम तस्कर इसे बाहर नहीं ले जा पा रहे हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मंदसौर कांड इसी की परिणति है.’’ अपनी बात को सही ठहराने के लिए उन्होंने तर्क दिया कि मध्यप्रदेश में यदि किसान परेशान हैं, तो किसानों का यह आंदोलन प्रदेश के अन्य भागों में क्यों नहीं हुआ. यह मंदसौर जिले में ही क्यों केन्द्रित था और वहीं क्यों हिंसा, आगजनी एवं तोडफोड की घटनाएं हुई.

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अफीम के अवैध व्‍यापार पर सरकार ने की है सख्‍ती
भार्गव ने कहा के पहले मंदसौर को देश में अफीम का केन्द्र समझा जाता था, लेकिन डोडा चूरा एवं अफीम पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार इसके अवैध व्यापार पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है, जिससे चलते तस्करों ने मंदसौर कांड किया. उन्होंने कहा कि कोई भी किसान दूध एवं सब्जियों को सड़क पर नहीं फेंक सकता है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर इशारा करते हुए भार्गव ने कहा कि किसानों के शवों के ऊपर राजनीति ना करें. उन्होंने कहा, ‘‘राजनीति करने के लिए कई मुद्दे हैं.’’ गौरतलब है कि मंदसौर गोली कांड की जांच के लिए प्रदेश सरकार ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जे के जैन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग बनाया है.

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सरकार ने माना, हिंसा रोकने के प्रयास में 6 लोगों की मौत हुई
सदन के अंदर गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा, 'छह जून को मंदसौर में पिपल्या मंडी में किसान आंदोलन के दौरान ना केवल हाईवे पर चक्का जाम किया गया, बल्कि गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगज़नी भी हुई, पुलिस पर पथराव हुआ, जानलेवा हमला किया गया. ऐसे में व्यवस्था बनाए रखने पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी.'

- उन्‍होंने सदन में ये भी बताया कि हिंसा रोकने के प्रयास में 6 लोगों की मौत हुई जबकि 6 घायल हुए.
- पूरे किसान आंदोलन के दौरान 109 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी घायल हुए.
- पुलिस ने 895 आंसू गैस के गोले छोड़े.
- 29 लोगों को आंदोलन के दौरान चोट आई
- पूरे आंदोलन के दौरान लगभग 325 मामले दर्ज किये गये हैं

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हालांकि सदन के बाहर अफीम तस्करों और हिंसा पर गृहमंत्री उतने गरम नहीं थे. सदन के बाहर उन्‍होंने कहा, 'आंदोलन पहले शांतिपूर्ण थी, किसान वाकई परेशान हैं. लेकिन ये सच है कि बाद में असामाजिक तत्व इसमें शामिल हो गए.'

कांग्रेस इस मुद्दे पर गृहमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक का इस्तीफा चाहती है. कांग्रेस के सचिव जीतू पटवारी ने कहा, 'जिले के लिये एसपी जिम्मेदार थे तो उन्हें हटाया गया, राज्य के लिये मुख्यमंत्री जि़म्मेदार हैं तो उन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिये.'

सरकार ने ये भी माना कि 6 महीने में 189 किसानों ने खुदकुशी की है, लेकिन उसके हिसाब से कर्ज की वजह से जान देने वालों की संख्या सिर्फ 6 है.

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