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पेड न्यूज मामला : मध्यप्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा फिर फंसे, चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

पेड न्यूज मामले में अयोग्यता से राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

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पेड न्यूज मामला : मध्यप्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा फिर फंसे, चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

मध्यप्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. मामला 2008 के विधानसभा चुनाव में खर्च से जुड़ा
  2. तीन साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई गई थी
  3. आयोग ने नरोत्तम को विधानसभा सदस्यता से अयोग्य घोषित किया था
नई दिल्ली: मध्यप्रदेश के जल संसाधन और जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा के पेड न्यूज मामले में चुनाव आयोग ने अयोग्यता से राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. चुनाव आयोग ने तुरंत  दिल्ली हाईकोर्ट के एक पक्षीय अंतरिम फैसले पर रोक लगाने की मांग की है.
 
चुनाव आयोग ने कहा है कि पेड न्यूज की गणना को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के हिस्से पर भी तत्काल रोक लगे, क्योंकि आयोग चार राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनाव की घोषणा करने वाला है. हाईकोर्ट के फैसले का असर इन चुनावों पर भी पड़ सकता है.

गत 18 मई को मध्यप्रदेश के जल संसाधन और जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा को चुनावी खर्च की सही जानकारी न देने (पेड न्यूज) के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली थी. हाईकोर्ट की डिवीजनल बेंच ने चुनाव आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें आयोग ने नरोत्तम को विधानसभा सदस्यता से अयोग्य घोषित किया था. उनके तीन साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई गई थी. यह मामला 2008 के विधानसभा चुनाव में खर्च से जुड़ा है. फैसले के चलते नरोत्तम पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाल पाए थे.  

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जून 2017 में  चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व कानून 1951, में 10 (ए) के तहत 23 जून, 2017 को तीन साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया था. वहीं, धारा 7 (बी) के अनुसार विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराया था. इसके बाद वे विधानसभा के सदस्य भी नहीं रह सकते थे. 2008 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम ने डबरा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था.
 
नरोत्तम मिश्रा ने आयोग के फैसले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में चुनौती दी थी, लेकिन वकीलों की हड़ताल की वजह से सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद यह केस जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा और बाद में  सुप्रीम कोर्ट ने इसे सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट भेज दिया.इसके बाद मिश्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में अर्जी लगाई, जो खारिज हो गई. बाद में डबल बेंच से भी याचिका खारिज हुई तो नरोत्तम 28 जुलाई को फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. कोर्ट ने इस पर सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट को आदेश दिया.

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नरोत्तम के खिलाफ कांग्रेस के राजेन्द्र भारती ने 2009 में आयोग के सामने एक याचिका दायर कर कहा था कि मिश्रा ने 2008 के विधानसभा चुनाव के खर्चे का सही ब्योरा नहीं दिया. उन्होंने कई मदों में किए गए खर्चे नहीं दिखाए, जिनमें ‘पेड न्यूज’ भी शामिल हैं. इसमें उन्होंने 8 से 27 नवंबर के बीच 42 खबरों की प्रतियां भी लगाई थीं, जो पेड न्यूज की श्रेणी में आती हैं.

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आयोग ने मिश्रा की शिकायत की जांच में पाया कि उनकी कुछ अखबारों में प्रकाशित सामग्री पेड न्यूज के दायरे में आती है. आयोग ने माना कि उन्होंने चुनाव खर्च का सही ब्योरा नहीं दिया है. चुनाव खर्च की सीमा 10 लाख रुपये थी और खर्च 13,50,780 रुपए किए. आयोग ने जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत उन्हें सदस्यता से अयोग्य ठहराया.


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