कोरोनावायरस के लॉकडाउन में सुरक्षित रहने के लिए आदिवासियों ने पत्तों से बनाए मास्क

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल कांकेर जिले में आदिवासियों ने कोरोना वायरस की दहशत के बीच अपनी सुरक्षा के लिए साल के पत्तों से देशी मास्क बनाया है. आमाबेड़ा इलाके के भर्रीटोला गांव के आदिवासियों ने प्राकृतिक उपायों से खुद को कोरोना वायरस से बचाने के लिए यह तरीका अपनाया है.

कोरोनावायरस के लॉकडाउन में सुरक्षित रहने के लिए आदिवासियों ने पत्तों से बनाए मास्क

आदिवासियों ने पत्तों से बनाए मास्क

बस्तर:

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल कांकेर जिले में आदिवासियों ने कोरोना वायरस की दहशत के बीच अपनी सुरक्षा के लिए साल के पत्तों से देशी मास्क बनाया है. आमाबेड़ा इलाके के भर्रीटोला गांव के आदिवासियों ने प्राकृतिक उपायों से खुद को कोरोना वायरस से बचाने के लिए यह तरीका अपनाया है. आदिवासी परिवारों ने साल पेड़ के पत्तों से एक मास्क बनाया है और कोरोना वायरस से बचने के लिए घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं.

आदिवासियों का कहना है कि आमाबेड़ा इलाके में कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क नहीं मिल रहा है और यहां से कांकेर शहर आने जाने की सुविधा नहीं है. इसलिए बस्तर के आदिवासी अंदरूनी इलाकों में देशी मास्क से खुद को सुरक्षा का भरोसा दे रहे हैं.

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वहीं, पिछले दिनों एक शख्स ने ट्विटर पर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) से एक ऐसी चीज की मांग की, जिसको देखकर कुछ लोग गुस्सा हो गए. भूपेश बघेल ने एक ट्वीट करते हुए जानकारी दी कि ''कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण का प्रभाव छत्तीसगढ़ में भी प्रकाश में आया है, जिसे दृष्टिगत रखते हुए संक्रमण पर प्रभावी रोकथाम हेतु लोकहित में राज्य के सभी नगरीय क्षेत्र में संचालित होने वाली समस्त सिटी बस सेवा को आगामी 29 मार्च तक तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है.'' जिस पर आकाश चौबे नाम के ट्विटर यूजर ने पूछा, ''सर वाइन शॉप कब बंद होंगे. भीड़ वहां भी बहुत होती है.''

जिस पर भूपेश बघेल ने ट्वीट का रिप्लाई दिया, ''Done, ऑर्डर इशू हो चुका है.'' जिसके बाद कुछ लोग आकाश की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ लोग उन पर गुस्सा प्रकट किया.