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यह है मध्यप्रदेश में सरकार के रोजगार देने के दावों की हकीकत

रोजगार मेलों में नियुक्ति पत्र की जगह दिए जा रहे आशय पत्र, स्वरोजगार को भी नौकरियों की संख्या में जोड़कर दिखाया जा रहा

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यह है मध्यप्रदेश में सरकार के रोजगार देने के दावों की हकीकत

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. तीन माह की निशुल्क ट्रेनिंग के बाद नियुक्ति दी जाएगी
  2. तीन माह तक खर्चा उम्मीदवार को उठाना होगा
  3. बेरोज़गार सेना ने कहा- सरकार आंकड़ों की बाजीगरी दिखा रही
भोपाल: मध्यप्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति बेहद गंभीर है. पिछले दो सालों में बेरोजगारी 53% बढ़ गई है. नई कम्पनियां आ नहीं रही हैं और पुरानी कंपनियां भी बंद हो रही हैं. ऐसे में मई 2018 में सरकार ने ऐलान किया कि चार अगस्त को पूरे प्रदेश के युवाओं को एक दिन में एक लाख नौकरियां दी जाएंगी. लेकिन हकीकत छतरपुर के जुगल किशोर अहिरवार से समझी जा सकती है, जिन्हें चार अगस्त को नौकरी का नियुक्ति पत्र नहीं बल्कि आशय पत्र मिला.

जुगल किशोर को मिले आशय पत्र में लिखा- इंटरव्यू देने अहमदाबाद आ जाएं, वो भी अपने खर्च पर. जुगल के लिए ये मुमकिन नहीं था. उन्होंने कहा मैंने फॉर्म भरा, एक लेटर मिला जिसमें कहा गया तीन माह निशुल्क ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी उसके बाद नियुक्त किया जाएगा लेकिन हमारी तीन माह निशुल्क काम करने की क्षमता नहीं है.

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जुगल जैसे युवाओं को रोजगार देने, मध्यप्रदेश सरकार ने 4 अगस्त को बड़ा आयोजन किया, 51 जिलों में रोजगार मेले लगाए. मंत्री इन जिलों में पहुंचे फोटो खिंचवाए फिर दावा किया कि इन मेलों में 1,25,758 नियुक्तियां की गई हैं और स्वरोजगार के 60 हजार और मुद्रा लोन के एक लाख हितग्राहियों समेत कुल 2,97,069 लोगों को नौकरी/स्वरोजगार दिया गया है. इन दावों की  हकीकत छिंडवाड़ा के श्रवण से सुनिए. वे कहते हैं 5-6 बार रोजगार मेला आया कुछ नहीं हुआ, लोन भी नहीं मिला.

बेरोज़गारों के लिए काम करने वाली बेरोज़गार सेना का कहना है कि दरअसल सरकार ने यहां आंकड़ों की बाजीगरी दिखाई. सरकार ने संख्या बढ़ाकर दिखाने रोजगार, स्वरोजगार और मुद्रा लोन के हितग्राहियों का आंकड़ा एक साथ कर दिया. जो नौकरियां रोजगार मेले में दी जा रही थीं वे आम तौर पर 10 वीं पास व्यक्ति के लिए थीं. जबकि एप्लाई करने वाले अधिकतर लोग कम से कम ग्रेजुएट थे. इंटरनेशनल जॉब फेयर में फ्रेशर्स के लिए एक भी नौकरी नहीं थी. अनुभवी लोग इसमें आए ही नहीं.
 
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सबसे प्रमुख बात यह थी कि जिन 1,25,758 "नियुक्तियों" की बात सरकार कह रही है दरअसल वे नियुक्तियां नहीं हैं बल्कि केवल LoI (Letter of Intent) यानी आशय पत्र हैं. बेरोज़गार सेना के अध्यक्ष अक्षय हुंका का कहना है आशय पत्र बांटकर गिनती बढ़ा दी गई है. एलओआई के नाम पर बेवकूफ बनाया गया है. चुनाव से पहले बरगलाने की कोशिश है लेकिन नौजवान अच्छे से समझते हैं कौन साथ खड़ा है कौन खिलाफ.
      
हालांकि सरकार का कहना है, आंकड़े सही हैं, स्वरोजगार पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है. रोज़गार मंत्री दीपक जोशी ने कहा रोज़गार मेले का मतलब सिर्फ तत्काल नियुक्ति देना नहीं. अलग-अलग क्षेत्रों में डिग्रीधारी को आमंत्रित करते हैं, आशय पत्र से मतलब ये है कि कंपनी परफॉरमेंस, इंटरव्यू के बाद नियुक्ति पत्र देंगी. हम सिर्फ नौकरी देने की नहीं, बल्कि नौजवान खुद जॉब देने वाले बनें इसके लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, प्रधानमंत्री योजना में लोन भी दे रहे हैं, ताकि वे खुद के पैर पर खड़े हो सकें.
 
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उधर कांग्रेस ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाते हुए नई रणनीति बनाई है. बेरोजगार युवाओं से फॉर्म भरवाकर ये वादा किया जा रहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर सबको नौकरी दी जाएगी नहीं तो बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा. कांग्रेस प्रवक्ता दीप्ति सिंह ने कहा आप जाओ कोशिश करेंगे. पुख्ता नहीं कह सकते रोजगार दे दिया है. एक तरह से चुनाव आने वाले हैं इसलिए उन्हें प्रभावित करने के लिए ये कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश का युवा जानता है किस तरह की बेरोजगारी है. उच्च शिक्षा प्राप्त ये मांग कर रहा है, मुख्यमंत्री मामा हैं फिर भी ठेके पर नौकरी के लिए आवेदन देना पड़ रहा है.

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सरकारी आंकड़े कहते हैं, मध्यप्रदेश में लगभग एक करोड़ 41 लाख युवा हैं. पिछले 2 सालों में राज्य में 53% बेरोजगार बढ़े हैं. दिसम्बर 2015 में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 15.60 लाख थी जो दिसम्बर 2017 में 23.90 लाख हो गई है. प्रदेश के 48 रोजगार कार्यालयों ने मिलकर 2015 में कुल 334 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है. यानि हर छठे घर में एक युवा बेरोजगार हैं.


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