शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट विस्तार का पेंच फिर फंसा, इन वजहों से नहीं बन पा रही है बात

केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच बैठकों का कई दौर चला लेकिन कैबिनेट विस्तार के नामों पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया.

शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट विस्तार का पेंच फिर फंसा, इन वजहों से नहीं बन पा रही है बात

केंद्रीय नेतृ्त्व और शिवराज सिंह के बीच नहीं बनी बात

भोपाल:

केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच बैठकों का कई दौर चला लेकिन कैबिनेट विस्तार के नामों पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया. लिहाजा शिवराज कैबिनेट के दूसरे विस्तार पर अभी भी सस्पेंस के बादल मंडरा रहे हैं. मंगलवार को शिवराज सिंह भोपाल लौट आए और पूरे मामले पर चुप्पी साधे रहे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्यों और केंद्रीय नेतृत्व के बीच नामों पर अंतिम सहमति नहीं बन पाना कैबिनेट विस्तार में विलंब का कारण है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे की तरफ से 9 और लोगों को आगे बढ़ाने की मांग के बाद यह मुश्किल हालात पैदा हुए. सिंधिया अपने 11 करीबियों के लिए मंत्री पद मांग रहे हैं. वहीं केंद्रीय नेतृत्व चौहान से गुटखा किंग पर छापे और राज्यसभा के दौरान हुए उपद्रव को लेकर नाराज हैं और उनसे उनके करीबी अधिकारियों से जुड़े सवाल भी पूछे गए. 

इधर सिन्धिया के करीबियों का बीजेपी में शामिल होना बीजेपी के उन नेताओं को नाराज कर सकता है जो मंत्री पद पर नजर बनाए हुए थे और यह नाराजगी पार्टी के कार्यकर्ताओं तक भी पहुंच सकती है.  सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व ने इस बात भी चिंता जताई है कि कुछ खास चेहरों को चौहान मंत्रिमंडल में बार बार जगह मिल रही है. जबकि ग्वालियर और चंबल के नेताओं को जगह नहीं मिली. शिवराज सिंह चौहान अपने करीबी कहे जाने वाले भूपेंद्र सिंह, रामपाल सिंह औऱ राजेंद्र शुक्ला को कैबिनेट में जगह दिलाना चाहते हैं. इसके अलावा दो उपमुख्यमंत्रियों के मामलों को लेकर भी फार्मूला उलझा हुआ है. जोकि गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के दिल्ली पहुंचने से जुड़ा हुआ है. नरोत्तम मिश्रा ने ही पर्दे के पीछे से कमलनाथ सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाई थी. 

सोमवार को शिवराज सिंह चौहान ने ज्योतिरादित्य सिन्धिया के साथ बैठक की थी. जिसके बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि मंगलवार को वह भोपाल पहुंचेंगे लेकिन सिन्धिया ने अपना दौरा रद्द कर दिया और अब तक इस पर कोई बयान भी जारी नहीं किया है. इस बीच, बीजेपी के एक पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कैलाश विजयवर्गीय पर गंभीर आरोप लगाए हैं, उन्होंने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनावों के दौरान विजयवर्गीय ने लगभग एक दर्जन भाजपा के बागियों को वित्त पोषित किया था, ताकि शिवराज सिंह चौथे कार्यकाल के लिए सत्ता हासिल न सकें. उनके आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के वीडी शर्मा ने कहा कि उन्हें भोपाल बुलाया गया है. शेखावत के साथ पूरे मामले पर चर्चा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी की जाएगी. 

Video: मध्य प्रदेश: शिवराज कैबिनेट विस्तार में कुछ नामों पर नहीं बन पा रही सहमति

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