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कहीं इसलिए तो नहीं दिया गया संतों को राज्यमंत्री का दर्जा, 'नर्मदा घोटाला रथ यात्रा' रद्द

इन लोगों ने राज्य सरकार पर सीधे सवाल उठाते हुए एक अप्रैल से "नर्मदा घोटाला रथ यात्रा" निकालने की घोषणा की थी, लेकिन राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद दोनों ने यह यात्रा रद्द कर दी है.

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कहीं इसलिए तो नहीं दिया गया संतों को राज्यमंत्री का दर्जा, 'नर्मदा घोटाला रथ यात्रा' रद्द

मंत्री दर्जा पाए कंप्यूटर बाबा.

खास बातें

  1. पांच लोगों को नर्मदा नदी की रक्षा के लिये राज्यमंत्री के दर्जे से नवाजा
  2. प्रस्तावित 'नर्मदा घोटाला रथ यात्रा' रद्द कर दी
  3. राज्य सरकार के तीन अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार मिला दर्जा.
इंदौर: मध्यप्रदेश में चुनावी साल में जिन पांच लोगों को नर्मदा नदी की रक्षा के लिये राज्यमंत्री के दर्जे से नवाजा गया है, उनमें शामिल एक संत समेत दो लोगों ने सूबे की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रस्तावित 'नर्मदा घोटाला रथ यात्रा' रद्द कर दी है.  इन लोगों ने राज्य सरकार पर सीधे सवाल उठाते हुए एक अप्रैल से "नर्मदा घोटाला रथ यात्रा" निकालने की घोषणा की थी, लेकिन राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद दोनों ने यह यात्रा रद्द कर दी है.

राज्य सरकार के तीन अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के विभिन्न चिन्हित क्षेत्रों में विशेषतः नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता का अभियान निरंतर चलाने के लिये 31 मार्च को विशेष समिति गठित की गई है. इस समिति के पांच विशेष सदस्यों-नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, भैयू महाराज, कम्प्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया गया है. 

बहरहाल, समिति में शामिल इंदौर के कम्प्यूटर बाबा की अगुवाई में एक अप्रैल से 15 मई तक प्रदेश के प्रत्येक जिले में "नर्मदा घोटाला रथ यात्रा" निकालकर इस नदी की बदहाली का मुद्दा उठाने की रूप-रेखा तय की गयी थी. इस मुहिम की प्रचार सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल है जिससे पता चलता है कि यह यात्रा नर्मदा नदी में जारी "अवैध रेत खनन पर अंकुश लगवाने" और "इसके तटों पर किये गये पौधारोपण के घोटाले" की जांच की प्रमुख मांगों के साथ निकाली जानी थी.

पढ़ें : मध्य प्रदेश: कंप्यूटर बाबा समेत इन 5 संतों को मिला राज्य मंत्री का दर्जा, कांग्रेस बोली- ये राजनीतिक छलावा है

राज्यमंत्री का दर्जा हासिल करने के बाद कम्प्यूटर बाबा ने कहा, "हम लोगों ने यह यात्रा निरस्त कर दी है, क्योंकि प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के संरक्षण के लिये साधु-संतों की समिति बनाने की हमारी मांग पूरी कर दी है. अब भला हम यह यात्रा क्यों निकालेंगे." यह पूछे जाने पर कि क्या एक संन्यासी के रूप में उनका राज्यमंत्री स्तर की सरकारी सुविधाएं स्वीकारना उचित होगा, उन्होंने जवाब दिया, "अगर हमें पद और दूसरी सरकारी सुविधाएं ​नहीं मिलेंगी, तो हम नर्मदा नदी के संरक्षण का काम कैसे कर पायेंगे. हमें समिति के सदस्य के रूप में नर्मदा नदी को बचाने के लिये जिलाधिकारियों से बात करनी होगी और दूसरे जरूरी इंतजाम करने होंगे. इसके लिये सरकारी दर्जा जरूरी है." 

जिन योगेंद्र महंत को कम्प्यूटर बाबा के साथ विशेष समिति में शामिल कर राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है, वह "नर्मदा घोटाला रथ यात्रा" के संयोजक थे.

पढ़ें : कम्प्यूटर बाबा समेत 5 संतों को मध्य प्रदेश सरकार ने बनाया राज्यमंत्री

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बहरहाल, राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद महंत ने भी कहा कि नर्मदा नदी को बचाने के लिये समिति बनाये जाने की मांग प्रदेश सरकार द्वारा पूरी किये जाने के कारण यह यात्रा निरस्त कर दी गयी है.

इस बीच, कांग्रेस ने कम्प्यूटर बाबा और महंत की मंशा पर सवाल उठाये हैं. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा, "इन दोनों को स्पष्ट करना चाहिये कि उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार के साथ कौन-सी डील के तहत नर्मदा घोटाला रथ यात्रा रद्द कर दी है. क्या इन्होंने राज्यमंत्री का दर्जा हासिल करने के लिये ही इस यात्रा का ऐलान किया था."


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