NDTV Khabar

शिव'राज' के 12 साल पूरे: गरीबों को ये कैसा तोहफा! भगवान भरोसे 'रसोई'

मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार ने दीन दयाल रसोई योजना को गाजे-बाजे के साथ शुरू किया था, लेकिन अब जनभागीदारी के नाम पर बस इसे भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है.

701 Shares
ईमेल करें
टिप्पणियां
शिव'राज' के 12 साल पूरे: गरीबों को ये कैसा तोहफा! भगवान भरोसे 'रसोई'

मध्य प्रदेश में दीनदयाल रसोई योजना खस्ताहाल

खास बातें

  1. कई जिलों में दीनदयाल रसोई का बुरा हाल
  2. रसोई से हाथ पीछे खींच रही है सरकार
  3. भाजपा बोली, इसके लिए जन भागीदारी जरूरी
भोपाल: मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने बतौर मुख्यमंत्री 12 साल पूरे कर लिए हैं. इस मौके पर राज्य में जश्न आयोजित हो रहा है. सरकार अपनी उपलब्धियां गिनवा रही है, लेकिन हकीकत में कई सरकारी योजनाएं दम तोड़ने के कगार पर हैं. उसी में एक है दीन दयाल रसोई योजना, जिसे गाजे-बाजे के साथ शुरू तो किया गया, लेकिन अब जनभागीदारी के नाम पर बस इसे भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. विजय भोपाल में मजदूरी करते हैं और रोजाना दो-ढाई सौ रुपये कमाते हैं. 7 लोगों का परिवार है, ऐसे में दीनदयाल रसोई में 5 रुपये में भरपेट खाना बड़ा आसरा है. विजय ने कहा, हम लोगों को इसी का सहारा है, बाहर खाते हैं दाल-चावल तो 50-60 रुपये लगते हैं फिर भी पेट नहीं भरता. यहां खाना ठीक रहता है, पेट भर जाता है. लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के शाहजहानी पार्क के पास खुले इस दीनदयाल रसोई में विजय जैसे लोग शायद दिसंबर 1 से खाना ना खा पाएं. रसोई के संचालक कहते हैं, एक थाली 18-20 रुपये की पड़ती है 5 रुपये में बगैर किसी मदद के खाना खिलाना अब उनके बस की बात नहीं.

यह भी पढ़ें : मध्य प्रदेश : पाठ्यक्रम में पद्मावती को शामिल करना बड़ी चुनौती, पहले से इंतजार में कई महापुरुष

यहां रसोई चलाने वाले अभिजीत अस्थाना ने कहा, हमने निगम को 30 तारीख तक सूचना दे दी है, हम खाना नहीं दे पाएंगे. 18 रुपये प्रति थाली पड़ती है, 13 रुपये घाटा जाता है, हम नहीं चला पाएंगे. पहले सरकार की ओर से वादा किया गया कि घाटा नहीं होने देंगे. अबतक 2 लाख लोगों को खाना खिला चुके हैं. नगर निगम के पास दान आया है, वो पैसा भी नहीं मिला है. 5 रुपये में रोज यहां 300-400 लोग खाना खाते हैं. जिस दिन सरकार 12 साल का जश्न मना रही है, उनके लिये उस दिन रसोई बंद होने की खबर किसी कहर से कम नहीं. सिर्फ भोपाल ही नहीं खुद मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर में भी रसोई बंद होने वाली है. 7 अप्रैल, 2017 से शहर के बस स्टैंड पर योजना शुरू हुई थी. 228 दिन में लगभग डेढ़ लाख लोग खाना खा चुके हैं, लेकिन अब संचालक प्रदीप शर्मा कहते हैं कि रसोई चलाना उनके बूते की बात नहीं.

यह भी पढ़ें : अब मध्‍य प्रदेश में रेप के दोषि‍यों को होगी फांसी...

शिवराज सिंह चौहान 12 साल कुर्सी पर बैठने के जश्न में डूबे हैं. सरकार मानती तो है कि योजना कमजोर हो रही है, लेकिन शायद फिलहाल इस पर सोचने का वक्त नहीं मिला है. सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा, ये सही है कि योजना शुरू में बहुत सफलता से चली, लेकिन कुछ जिलों में कमजोर हो रही है. प्रभावी तौर से योजना चले इस बारे में हम फैसला करेंगे.

यह भी पढ़ें : पिता को 'डैड' कहे जाने पर शिवराज सिंह बोले- यह अंग्रेजी के मोह से जुड़ी अजीब सी विकृति है

कांग्रेस को लगता है कि सरकार सिर्फ मार्केटिंग करती है, वहीं बीजेपी का मानना है कि जिम्मेदारी समाज की भी है. कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा, इनका पूरा एजेंडा रहता है मार्केटिंग करें, लेकिन ग्राउंड पर देखें तो सिर्फ कागजों पर चल रही है, जमीन पर कोई असर नहीं है. वहीं बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास था पहले सरकारी भागीदारी से हो, बाद में इसे जनभागीदारी में बदला जाए... इसमें प्रशासन की मदद चाहिए, समाज सेवियों को भी चाहिए कि वो आगे आएं.

VIDEO : मध्य प्रदेश में दीनदयाल रसोई योजना का हाल
तमिलनाडु की अम्मा कैंटीन की तर्ज पर मध्यप्रदेश में अप्रैल के महीने में दीनदयाल रसोई शुरू हुई, इसके बाद यूपी में प्रभु की रसोई आई. फोटो खिंच गए, लेकिन जब वाकई गरीब इस रसोई से निवाला खाना लगे तो सरकार हाथ पीछे खींच रही है.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement