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स्‍पेशल रिपोर्ट : मध्‍य प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच युवाओं ने किया बेरोजगार सेना का गठन

एक अनुमान के मुताबिक राज्य में हर छठे घर में एक युवा बेरोजगार है और हर 7वें घर में एक शिक्षित युवा बेरोजगार बैठा है.

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स्‍पेशल रिपोर्ट : मध्‍य प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच युवाओं ने किया बेरोजगार सेना का गठन
भोपाल:

मध्यप्रदेश में बेरोज़गारों की तादाद बढ़ती जा रही है. हालात ऐसे हैं कि कुछ युवाओं ने बेरोजगारी रोकने के लिए ठीक राष्ट्रीय युवा दिवस पर बेरोजगार सेना का गठन किया है. सरकार का कहना है कि केन्द्र और राज्य दोनों प्रयासरत हैं और हालात कांग्रेस के शासन से बहुत अच्छे हुए हैं. एक अनुमान के मुताबिक राज्य में हर छठे घर में एक युवा बेरोजगार है और हर 7वें घर में एक शिक्षित युवा बेरोजगार बैठा है. सत्यप्रकाश त्रिपाठी केमेस्ट्री में एमएससी हैं, रोज़गार की आस में दो तीन डिग्री और हासिल कर ली, लेकिन फिलहाल बेरोज़गार हैं. त्रिपाठी ने कहा, 'मैं सोशियोलॉजी में यूनिवर्सिटी टॉपर हूं, ग्रामीण विकास में डिप्लोमा लिया, बीएड, एमफिल भी हूं, रोज़गार नहीं मिला. कई जगह कोशिश की लेकिन भ्रष्टाचार या कुछ और वजह थी कि चयन नहीं हुआ.'

सरकारी आंकड़े कहते हैं, मध्यप्रदेश में लगभग 1 करोड़ 41 लाख युवा हैं. पिछले 2 सालों में राज्य में 53% बेरोजगार बढ़े हैं. दिसम्बर 2015 में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 15.60 लाख थी जो दिसम्बर 2017 में 23.90 लाख हो गयी है. प्रदेश के 48 रोजगार कार्यालयों ने मिलकर 2015 में कुल 334 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है.


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बेरोज़गार सेना के अध्यक्ष अक्षय हुंका ने कहा, 'हमारी एक मांग है, जैसे मनरेगा का कानून बनाया, वैसे शिक्षित बेरोजगारों के लिये शिक्षित युवा गारंटी कानून बनाएं. मध्यप्रदेश में बड़ी-बड़ी डिग्री ले लीजिये लेकिन नौकरी नहीं मिलती जिसकी गलती सरकार और उसकी पॉलिसी की है. रोज़ी कमाना और जिसके लिये पढ़ाई की बड़ी डिग्री अर्जित करने में उसे पकौड़े का ठेला लगाना पड़ रहा है, इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता. देश के प्रधानमंत्री ऐसा बोल रहे हैं तो बेरोजगारों पर हथौड़ा चला रहे हैं पकौड़े के नाम पर.'

कुछ दिनों पहले सागर ज़िले में देवरी तहसील के राजेन्द्र बड़कुल की बिटिया रागिनी की शादी के लिये छपे कार्ड में भाई अनुराग ने लिखवाया 'मेरी भूल कमल का फूल', क्योंकि 2010 में स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर नियुक्त हुए भाई की नौकरी 2017 में चली गई, ऐसे करीब 473 कर्मचारी थे.

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मध्यप्रदेश में रोज़गार कार्यालय है, दीपेन्द्र जैसे कई युवा यहां आते थे. लेकिन अब यहां भीड़ नहीं जुटती, एमए कर रहे दीपेन्द्र ने पटवारी की परीक्षा दी थी जिसमें हज़ार पदों के लिये लाखों उम्मीदवारों ने फॉर्म भरा. दीपेन्द्र ने बताया, 'मैंने पटवारी की परीक्षा दी, फॉरेस्ट की दी, संविदा की तैयारी में हूं. पटवारी की परीक्षा में 9238 वैकेंसी थी, तकरीबन 12 लाख फॉर्म भरे गये, अब मेरिट पर लिस्ट बनेगी. राज्य में बेरोजगारी बहुत ज्यादा है, पद कम निकलते हैं.

मध्यप्रदेश में सरकार के पास ही लगभग 1 लाख से अधिक वैकेंसी है, लेकिन लोगों को रोज़गार दिलाने वाला दफ्तर तक खाली है. ज़िला रोज़गार कार्यालय भोपाल के प्रबंधक के एस मालवीय ने कहा, 'बेरोजगारी की समस्या तो बढ़ती जा रही है, सरकारी नौकरियां घट तो रही हैं, हर साल लाखों बच्चे निकलते हैं.'

देश में शिक्षित बेरोजगारी के खिलाफ कोई कानून नहीं है, बेरोजगारों की तादाद बढ़ रही है लेकिन फिर भी सरकार समस्या को समस्या मानने से इनकार कर रही है, आंकड़े उसे कुतर्क लगते हैं. विपक्ष का आरोप है रोज़गार मंत्री-पुत्रों को ही मिल रहा है. सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, 'हम केवल रोजगार कार्यालय के आंकड़े से रोजगार को नहीं देख सकते. मैं इंजीनियर हूं, राजनीति में आया, ऐसा करना तर्क नहीं कुतर्क है. पढ़ाई का मतलब है ज्ञान.' वहीं कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा, 'सरकार के पास वो इंफ्रास्ट्रक्टर नहीं जिससे रोजगार का सृजन हो, जो कारोबार हैं वो बंद हो रहे हैं. नोटबंदी का भी असर पड़ा है, विषम परिस्थियों में रोजगार सरकार शब्दों मे देने की कोशिश कर रही है जो अन्याय है.

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इन सबके बीच बेरोजगार सेना एक मिस्ड कॉल नंबर देकर शिक्षित युवाओं की सेना बनाने में जुटी है. मांग है कि एक शिक्षित युवा गारंटी कानून बनाया जाए.



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