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"मेरे और मेरे परिवार के लिए सुषमा स्वराज हमेशा देवी रहेंगी..."

देवेश शर्मा ने बताया, "अगले 48 घंटे मेरे लिए ईश्वर के वरदान की तरह बीते, क्योंकि सुषमा जी का स्टाफ मुझसे व्यक्तिगत संपर्क बनाए रहा, सभी मेडिकल फाइलें जुटाईं, और मेरे बेटे के ऑपरेशन के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू कीं...

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पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज (फाइल फोटो)

भोपाल:

केंद्रीय विदेशमंत्री के रूप में दुनियाभर में पहचान बनाने वाली सुषमा स्वराज का मध्य प्रदेश और अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा से गहरा नाता रहा है, लेकिन भोपाल का एक परिवार तो उन्हें कभी भूल ही नहीं सकता, क्योंकि वह सुषमा ही थीं, जिन्होंने उनके जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित नवजात पुत्र की जान बचाई थी. माया एन्क्लेव निवासी परिवार का यह पुत्र 23 जनवरी, 2017 को हृदय रोग के साथ जन्मा था, जिसका इलाज जल्द से जल्द ऑपरेशन से ही हो सकता था, ताकि बच्चा जीवित रह सके. इस बच्चे के सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिता देवेश शर्मा का कहना है, "मैं भोपाल में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल और एक हृदयरोग विशेषज्ञ से दूसरे हृदयरोग विशेषज्ञ तक चक्कर काट रहा था, लेकिन कोई भी मेरे नवजात बेटे को बचाने की खातिर इस नाज़ुक ASO सर्जरी को करने के लिए तैयार नहीं था... जब मुझे कहीं से भी मदद नहीं मिली, मैंने PMO, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री तथा विदेशमंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया... मुझे कुछ ही घंटे बाद सुषमा जी ने खुद जवाब दिया..."

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देवेश शर्मा ने बताया, "अगले 48 घंटे मेरे लिए ईश्वर के वरदान की तरह बीते, क्योंकि सुषमा जी का स्टाफ मुझसे व्यक्तिगत संपर्क बनाए रहा, सभी मेडिकल फाइलें जुटाईं, और मेरे बेटे के ऑपरेशन के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू कीं... मध्य प्रदेश की तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली BJP सरकार की कोशिशों से मेरे बेटे को एयरलिफ्ट कर दिल्ली ले जाया गया... बाद में सुषमा जी के पर्सनल स्टाफ की लगातार निगरानी में सर्जनों की टीम ने नई दिल्ली में मेरे बेटे का ऑपरेशन किया... मेरा बेटा, जो अब ढाई साल का है, और जिसे हम प्यार से कान्हा कहते हैं, स्वस्थ और अच्छा है, और अब उसका एक छोटा भाई भी है..."

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कान्हा के पिता ने कहा, "वह (सुषमा स्वराज) सभी के लिए बहन जैसी थीं, लेकिन मेरे और मेरे परिवार के लिए वह हमेशा एक देवी रहेंगी, जिन्होंने मेरे बेटे की जान बचाई... उन्होंने न सिर्फ मेरे बेटे की तत्काल सर्जरी सुनिश्चित की, बल्कि अपने किडनी ट्रांसप्लांट के बाद उसी अस्पताल में फॉलोअप के लिए आने पर वह मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलना भी नहीं भूलीं. उन्होंने मुझसे बेटे के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली, और वादा किया कि उसका नामकरण वही करेंगी... वह दुनिया से चली गई हैं, और मुझे लग रहा है, परिवार का कोई सदस्य नहीं रहा... मेरे बेटे का नामकरण उसकी जान बचाने वाले की ओर से नहीं हो पाया, लेकिन अगर मेरी कोई बेटी होती, या भविष्य में कोई बेटी हुई, तो उसका नाम सिर्फ सुषमा ही रखा जाएगा..."

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