सरदार सरोवर में जलस्तर बढ़ने से खतरे में डूब प्रभावित क्षेत्र, मेधा पाटकार ने की बांध के गेट खोलने की मांग

नर्मदा बचाओ आंदोलन की संयोजक मेधा पाटकर सहित पांच महिलाओं ने छोटा बड़दा में सत्याग्रह की शुरुआत की है और अनिश्चितकालीन उपवास की घोषणा की है.

सरदार सरोवर में जलस्तर बढ़ने से खतरे में डूब प्रभावित क्षेत्र, मेधा पाटकार ने की बांध के गेट खोलने की मांग

आंदोलन का कहना है कि 133 मीटर के ऊपर जल स्तर को नहीं बढ़ाया जाए.

खास बातें

  • 133 मीटर पहुंचा सरदार सरोवर बांध का जलस्तर
  • खतरे में मध्य प्रदेश के डूब प्रभावित क्षेत्र
  • पुनर्वास की मांग हुई तेज
भोपाल:

इंदिरा सागर परियोजना और ओंकारेश्वर परियोजना के बांधों से छोड़े गए पानी का सीधा असर बड़वानी जिले के सरदार सरोवर डूब क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है. यहां लगातार जलस्तर बढ़ता नजर आ रहा है.  इसी को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन और डूब प्रभावितों ने मध्य प्रदेश गुजरात और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.  आंदोलन का आरोप है कि सरकारों के द्वारा पुनर्वास में कोताही बरती गई है, जिसके चलते डूब प्रभावित परेशान हो रहे हैं. आज तक उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है. 

नर्मदा बचाओ आंदोलन की संयोजक मेधा पाटकर सहित पांच महिलाओं ने छोटा बड़दा में सत्याग्रह की शुरुआत की है और अनिश्चितकालीन उपवास की घोषणा की है. मेधा पाटकार का कहना है कि जलस्तर 133 मीटर के ऊपर जा चुका है. ऐसे में बगैर पुनर्वास डूब कराना अनुचित और असंवैधानिक है. 

नर्मदा बांध प्रभावितों के पुनर्वास का सवाल दशकों बाद भी अपनी जगह बरकरार

आंदोलन का कहना है कि 133 मीटर के ऊपर जल स्तर को नहीं बढ़ाया जाए और सरदार सरोवर बांध के गेट को खोल दिया जाए क्योंकि गुजरात राज्य में भी बारिश के चलते सभी बांध भरे जा चुके हैं, जिससे कि गुजरात को पानी को लेकर कोई समस्या नहीं होना है.  मध्यप्रदेश भी बिजली को लेकर खुद ही सक्षम है.  इन सभी बातों को मद्देनजर रखते हुए ना तो गुजरात को पानी की जरूरत है और ना ही मध्य प्रदेश को बिजली की ऐसे में बांध को पूरा भरे जाना उचित नजर नहीं आता और क्षेत्र में भी पूर्ण पुनर्वास अब तक नहीं हो पाया है ऐसे में सरदार सरोवर बांध के गेट को खोलकर मध्यप्रदेश के ग्रामीणों को डूब से बचाना चाहिए. 
 

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