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मध्य प्रदेश में महिला खिलाड़ियों को मिली 5 रुपये वाली थाली

खाने के लिये इनके कोच को गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिये दीनदयाल रसोई से 5 रुपये वाली थाली की पर्ची कटवाने पड़ी.

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मध्य प्रदेश में महिला खिलाड़ियों को मिली 5 रुपये वाली थाली

इन खिलाड़ियों के लिए एक पानी का टैंकर मैदान में खड़ा कर दिया गया

भोपाल: जहां एक तरफ पूरा देश कॉमनवेल्थ गेम्स में 26 गोल्ड मेडल मिलने पर गर्व महसूस कर रहा है. लेकिन खिलाड़ियों को यहां तक पहुंचने में कितना संघर्ष करना पड़ता है हमारे देश में ये हकीकत भी किसी से छिपी नहीं है. हम अपने खिलाड़ियों से हर प्रतियोगिता में सोने की उम्मीद तो करते हैं लेकिन सुविधाएं देने के नाम पर सरकारी तिजोरी खुलती नहीं है. ऐसी ही एक तस्वीर मध्यप्रदेश के दमोह से आई है, जहां राज्य की हॉकी टीम में चयन के लिए ट्रायल देने आई खिलाड़ियों को 5 रुपये की थाली से पेट भरना पड़ा.  मध्यप्रदेश के दमोह के जेपीबी गर्ल्स स्कूल के मैदान में 42 बच्चियां हॉकी के लिए ट्रॉयल देने आई थीं. इनमें से 18 राष्ट्रीय खेलों में मध्यप्रदेश की हॉकी टीम की नुमाइंदगी करेंगी.

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इन खिलाड़ियों के रहने के लिये गर्ल्स स्कूल के हॉस्टल में इंतजाम किया गया था लेकिन खाने के लिये इनके कोच को गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिये दीनदयाल रसोई से 5 रुपये वाली थाली की पर्ची कटवाने पड़ी. इतना ही नहीं प्रबंधको ने शिष्टाचार का भी ख्याल नहीं रखा और इन खिलाड़ियों के लिए पीने का पानी का एक टैंकर मैदान में रखवा दिया.  इन खिलाड़ियों का कोच भी ऐसी व्यवस्था के आगे मजबूर था क्योंकि ट्रायल में खिलाड़ियों के भोजन का कोई बजट नहीं होता है. ये बात सुनकर आप भी हैरान रह गए होंगे. मिली जानकारी के मुताबिक दस साल पहले राज्य सरकार ने ट्रायल में खिलाड़ियों के खाने-पीने के लिये बजट का प्रावधान बंद कर दिया था. राज्य की बीजेपी सरकार को लगता है कि 5 रुपये की थाली में गुणवत्ता की कमी नहीं होती, तो वहीं कांग्रेस इसे खिलाड़ियों का अपमान मानती है.

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कांग्रेस प्रवक्ता दीप्ति सिंह ने सीएम शिवराज पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री निवास में 3000 रूपये की थाली उपलब्ध है और जो बेटियां नाम रोशन करेंगी उन्हें 5 रूपये की थाली खिलाई जा रही है. आपको बता दें कि ये हालात तब हैं जब मध्यप्रदेश की बेटियां हॉकी में राष्ट्रीय स्तर पर 2015, 2016 में मेडल जीत चुकी हैं. सबसे बड़ी बात ये है कि अगर सरकार को लगता है कि 5 रूपये की थाली में पोषण-गुणवत्ता बरकरार रहती है, तो फिर क्यों ना इसे मुख्यमंत्री आवास के आयोजनों में आजमाया जाए. 


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