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Women's Day : नक्सली प्रभावित बस्तर में ITBP ने बनाई लड़कियों की पहली हॉकी टीम

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के मरदापाल के कन्या आश्रम में रहकर पढ़ रहीं 42 आदिवासी छात्राएं बन गईं हॉकी की शानदार खिलाड़ी

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Women's Day :  नक्सली प्रभावित बस्तर में ITBP ने बनाई लड़कियों की पहली हॉकी टीम

छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासी बच्चियों की हॉकी टीम में कई प्रतिभाएं निखर रही हैं.

खास बातें

  1. नक्सली हिंसा से ग्रस्त परिवारों की बच्चियां आत्मविश्वास से लबरेज
  2. शुरुआत में जूते के फीते तक बांधने की जानकारी नहीं थी छात्राओं को
  3. स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने छह बच्चियों का प्रशिक्षण के लिए चयन किया
नई दिल्ली:

नारी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आइटीबीपी ने छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित इलाके से पहली बार दो साल के लगातार परिश्रम के बाद बालिकाओं की हॉकी टीम तैयार करने में सफलता प्राप्त की है. महिला दिवस (Women's Day 2019) पर यह अति पिछड़े आदिवासी बहुल क्षेत्र के लिए एक तोहफा है.

आईटीबीपी ने कोंडागांव जिले के मरदापाल के कन्या आश्रम में रहकर अध्ययन कर रहीं 42 जनजातीय छात्राओं जिनकी उम्र 17 वर्ष से कम थी, को आईटीबीपी ने अपने स्तर पर प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया था. अगस्त 2016 से लेकर अभी तक इस विद्यालय में पढ़ रहीं बालिकाओं, जिनके पास खेलकूद से संबंधित कोई ज्ञान न था और कोई प्रेरणा नहीं थी, को प्रेरित कर हॉकी के खेल में आगे बढ़ने को तैयार किया. गौरतलब है कि मर्दापाल कन्या आश्रम में रह रही बालिकाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नक्सल हिंसा से ग्रसित परिवारों की बच्चियां हैं. इनमें से कई बच्चियों के परिवार अत्यंत गरीबी की दशा में जीवन यापन कर रहे हैं. इन बालिकाओं को शारीरिक अभ्यास, फिटनेस और खेल की प्रारंभिक बारीकियां सिखाने के बाद धीरे-धीरे इन्हें हॉकी के मैदान पर उतारा गया.

 

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आईटीबीपी के हॉकी कोच हेड कांस्टेबल सूर्या स्मिथ हैं जो स्वयं एक हॉकी के अच्छे खिलाड़ी हैं. उन्होंने और बल्कि 41 वीं वाहिनी ने इन बालिकाओं को जूते हॉकी स्टिक्स, जर्सी, गोल पोस्ट गोलकीपर किट तथा अन्य महत्वपूर्ण हॉकी से संबंधित उपकरण उपलब्ध करवाए. जब इन बच्चियों को हॉकी के मैदान के लिए तैयार करना शुरू किया गया तब इन्हें जूते के फीते तक बांधने की जानकारी नहीं थी. धीरे-धीरे इन्हें इस स्तर तक पहुंचा दिया गया कि अब छत्तीसगढ़ की बालिकाओं की टीम और अंडर-17 की टीमों में इन खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिल रहा है.

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स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी इनमें से छह बच्चियों को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया है और राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इन बालिकाओं ने कई बड़ी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर यह साबित कर दिया है कि वे किसी से कम नहीं हैं. इन बालिकाओं को एस्ट्रो टर्फ पर भी खेलने का मौका आईटीबीपी ने दिलवाया है.

 

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छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ से लगे इलाके में जहां सड़कों की स्थिति बहुत खराब है और कई स्थानों पर अभी भी सड़क मार्ग उपलब्ध तक नहीं है, चिकित्सा, शिक्षा और मुख्यधारा से जुड़े अन्य विकास कार्यों की घोर कमी वाले इस क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक रूप से विपन्न छात्राओं को हॉकी जैसे खेल में विकसित और प्रशिक्षित करके आईटीबीपी ने नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है.

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कोच सूर्य स्मिथ का कहना है कि कई छात्राओं ने स्वयं पहल करते हुए अतिरिक्त अभ्यास और लगन से हॉकी की ट्रेनिंग ली है जो दर्शाता है कि इलाके में बहुत प्रतिभा है जो आगे बढ़कर इन खेलों में क्षेत्र का नाम रोशन कर सकती हैं. कोंडागांव जिला धुर नक्सलवाद से प्रभावित रहा है.



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