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अगले 10 साल में मुंबई शहर में लोगों को मिल सकते हैं 16,000 सस्‍ते घर...

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अगले 10 साल में मुंबई शहर में लोगों को मिल सकते हैं 16,000 सस्‍ते घर...

महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को बीडीडी रीडेवलमेंट के लिए भूमिपूजन किया. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

मुंबई: बॉम्बे डेवलपमेंट डिपार्टमेंट, यानी बीडीडी चॉल, इनमें बसा है मुंबई का 100 साल पुराना इतिहास, लेकिन वक्त के थपेड़ों से इसकी रंगत बेरंग होती गई. परिवार बड़े, घर छोटे होते गए. सरकारों ने इसपर सियासत की, लेकिन इसके पुनर्विकास का मुद्दा लटका रहा. महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को बीडीडी रीडेवलमेंट के लिए भूमिपूजन कर दिया है, सब ठीक रहा तो अगले 10 साल में मुंबई शहर में मुंबईकरों को 16,000 घर मिल सकते हैं.

1920 में सर जॉर्ज लॉयड ने तत्कालीन बॉम्बे में रिहाइश की समस्या से निपटने के लिए बॉम्बे डेवलमेंट डायरेक्टरेट बनाया. जिन इलाकों में कपड़ा मिलों की चिमनियां थीं, वहां बीडीडी में लोग रहने लगे. नायगांव, वर्ली, शिवडी और एनएम जोशी मार्ग की 93 एकड़ ज़मीन पर 207 चॉलों में 15,593 किरायेदार हैं. पहली बार 2004 में बीडीडी का प्रोजक्ट प्लान बना. 2008, 2011 में फाइलों पर स्याही नहीं चली. योजना 2,000 करोड़ से बढ़कर 16,000 करोड़ रुपये हो गई. अब जाकर सरकार का कहना है दस साल के अंदर यहां लोगों को 500 वर्ग फुट के घर देंगे. 

जांबोरी मैदान में भूमिपूजन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा "पिछली सरकारों ने 15-16 में सिर्फ चर्चा की और कुछ नहीं किया, लेकिन हमारा सपना है कि हम इस परियोजना को किसी भी कीमत पर पूरा करें".

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यहां चॉल को चार की एफएसआई दी गई है, यानी जितने किरायेदार उससे दुगने फ्लैट. सरकार 5,000 फ्लैट बेचकर खर्च वसूलेगी. 10,000 फ्लैट सरकारी झोली में मुफ्त में आएंगे. फडणवीस ने बताया "पूरे इलाके में 68 फीसद हिस्सा यहां रहने वालों का होगा. सिर्फ 32 फीसद हम दूसरों को देंगे, ताकि उससे मिलने वाले पैसे से 68 फीसद हिस्से का विकास हो सके".

अगले दस साल में बीडीडी चॉल में भी 22 से लेकर 67 मंजिल के आलीशान मकान बनाने की योजना है, जिसके लिए म्हाडा को नोडल एजेंसी बनाया गया है. ग्लोबल टेंडर जारी कर आर्किटेक्ट भी चुन लिए गए हैं. सरकार का दावा है कि निर्माण के दौरान भी लोगों को कहीं शिफ्ट नहीं किया जाएगा. बस उम्मीद है तो इतनी कि इन गगनचुंबी इमारतों में ज़मीन के बाशिंदों को ही घर मिले, आसमान में उड़ने वाले कहीं इन्हें कब्जा ना लें.


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