BMC elections 2017: पार्षदों के समर्थन को लेकर शिवसेना-बीजेपी का एकसमान दावा

BMC elections 2017: पार्षदों के समर्थन को लेकर शिवसेना-बीजेपी का एकसमान दावा

बीएमसी चुनाव में बीजेपी और शिवसेना लगभग बराबरी पर आए हैं...

खास बातें

  • दलों ने एकसमान 4 निर्दलीय पार्षद अपने साथ होने का दावा किया है.
  • मेयर चुनने के लिए सर्वाधिक 114 वोटों की जरूरत होती है.
  • BMC का मेयर 8 मार्च के आसपास चुना जाना है.
मुंबई:

बीएमसी (BMC) के मेयर पद की दौड़ में आगे बढ़ने के लिए शिवसेना और बीजेपी ने जोर लगा दिया है. गौरतलब है कि दोनों दलों ने एकसमान 4 निर्दलीय पार्षद अपने साथ होने का दावा किया है. बीएमसी चुनाव में शिवसेना को 84 सीट मिली हैं. जबकि बीजेपी को 82. चुनावी नतीजों के बाद दोनों दलों ने दावा किया कि मेयर उन्हीं का होना चाहिए. लेकिन, आंकड़ों के हिसाब से देखे तो बिना समर्थन ये न बीजेपी के लिए मुमकिन है न शिवसेना के लिए. 227 सीटों के सदन में बिना समर्थन अपना मेयर चुनने के लिए सर्वाधिक 114 वोटों की जरूरत होती है, जो की शिवसेना और बीजेपी में से किसी के पास नहीं.

ऐसे में सर्वसाधारण बहुमत से मेयर चुने जाने की प्रक्रिया के तहत उस पार्टी का उम्मीदवार चुना जाता है जिसके पास बहुमत हो. ऐसे में कम संख्या होने पर निर्दलीयों का समर्थन लिया जाता है. इस जोड़-तोड़ की राजनीति में अपने ही पार्टी के बाग़ी स्नेहल मोरे की शिवसेना ने पार्षद बनने पर घरवापसी की है. उनके अलावा तुलसीराम शिंदे, चंगेज़ मुलतानी और किरण लांडगे से समर्थन का दावा शिवसेना ने किया है.

इस बीच बीजेपी ने निर्दलीय पार्षद राजा रहबर खान के समर्थन का ऐलान करते हुए अन्य तीन पार्षदों के समर्थन का दावा किया है. हालांकि बीजेपी ने उन्हें समर्थन करने वाले पार्षदों के नामों का ऐलान नहीं किया है.

बीएमसी में केवल 5 निर्दलीय पार्षद चुनकर आए हैं. ऐसे में शिवसेना और बीजेपी का 4-4 निर्दलीयों के समर्थन का दावा करना अपने आप ने दावे वजन कमजोर करता है. स्थानीय इकाई में समर्थन करनेवाले पार्षदों की रजिस्ट्री कराने पर ही उसे अंतिम माना जाता है. BMC का मेयर 8 मार्च के आसपास चुना जाना है.

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