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मुंबई: स्कूल जाने वाले बच्चों के बस्ते के वजन को कम करने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने की सुनवाई, कही यह बात...

न्यायालय ने कहा कि स्कूली बस्तों का भार की मात्रा निश्चित करने के लिए नए दिशा निर्देश देने की जरूरत नहीं है.

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मुंबई: स्कूल जाने वाले बच्चों के बस्ते के वजन को कम करने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने की सुनवाई, कही यह बात...

प्रतीकात्मक चित्र

मुंबई :

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बच्चों के स्कूली बस्ते के वजन को कम करने के निर्देश देने की मांग करने वाले वाली याचिका सोमवार को खारिज करते हुये कहा कि हमें नहीं लगता कि बच्चे अपने कंधों पर ‘अनावश्यक भारी बस्ते' ले जाते हैं क्योंकि वक्त के साथ किताबें पतली हो गयी हैं. न्यायालय ने कहा कि स्कूली बस्तों का भार की मात्रा निश्चित करने के लिए नए दिशा निर्देश देने की जरूरत नहीं है. हमारे जमाने में, हमारे किताबों का वजन ज्यादा होता था. पहले की तुलना में आजकल किताबें पतली हो गई हैं. मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजजोग और न्यायमूर्ति एनएम जामदार ने कहा, 'हमारी किताबों में दिखाया जाता था कि केवल औरतें ही घर का काम करती हैं, आज की किताबें दिखाती हैं कि पुरुष फर्श पर झाड़ू लगा रहे हैं. '

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पीठ ने कहा कि हमारी किताबें बहुत वजनी होती थीं लेकिन हमें पीठ की कोई समस्या नहीं हुई. गौरतलब है कि इससे पहले पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट ने  दिल्ली में स्कूल बैग का भार औपचारिक रूप से तय कर दिया गया था. दिल्ली सरकार के सर्कुलर में यह जानकारी दी गई थी. सर्कुलर में कहा गया था कि पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के बैग का वजन अधिकतम डेढ़ किलो, तीसरी से पांचवीं क्लास तक के बच्चों के बस्तों का भार 2-3 किलो, छठी-सातवीं क्लास के बच्चों का बैग चार किलो, आठवीं-नौवीं कक्षा के बच्चों के बैग का अधिकतम भार 4.5 किलो और दसवीं क्लास के बच्चों के बैग का वजन पांच किलो तय किया गया था.

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सर्कुलर में स्कूलों से यह भी कहा गया था कि पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को किसी प्रकार का होमवर्क नहीं दिया जाए. इसमें स्कूलों से बच्चों को निश्चित दिन पर पुस्तकें और नोटबुक लाने के बारे में पहले से ही सूचित करने को कहा गया था. सर्कुलर में कहा गया था, "भारी स्कूल बैग स्कूल के छात्रों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक गंभीर खतरा है. यह बढ़ते बच्चों पर गंभीर प्रतिकूल शारीरिक प्रभाव डालता है जो उनके वर्टिब्रल कॉलम और घुटनों को नुकसान पहुंचा सकता है."

सर्कुलर के मुताबिक, स्कूल बैग का भार पाठ्यपुस्तक, गाइडों, होमवर्क/क्लासवर्क नोटबुक, व्यर्थ कार्य के लिए नोटबुक, पानी की बोतलों, लंच बॉक्स और कभी-कभी भारी बैग होने से उसका भार बढ़ता है. यह भी कहा गया था कि छात्रों के समग्र विकास के लिए खेल, कला व संस्कृति और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ लाइब्रेरी की किताबें पढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस सप्ताह की शुरुआत में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को होमवर्क नहीं दिया जाना सुनिश्चित करने और पहली से दसवीं कक्षा के लिए तय किए गए स्कूली बैग के भार का पालन किए जाने को कहा था. (इनपुट भाषा से) 

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