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मेक इन इंडिया के तहत छोटे विमान के सपने को मिले पंख, 6 साल के बाद डीजीसीए ने किया रजिस्ट्रेशन

इस कोशिश में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मिली मदद के लिए इस विमान का नाम VT NMD यानी विक्टर टैंगो नरेंद्र मोदी देवेंन्द्र रखा गया है.

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मेक इन इंडिया के तहत छोटे विमान के सपने को मिले पंख, 6 साल के बाद डीजीसीए ने किया रजिस्ट्रेशन

खास बातें

  1. पहले स्वदेशी विमान को मिला नरेंद्र मोदी और देवेंन्द्र फडणवीस का नाम
  2. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अनोखा तरीका
  3. छत पर विमान बनाने वाले पायलट अमोल यादव के अपने विमान का सपना होगा पूरा
मुंबई:

6 साल बाद ही सही आखिरकार डीजीसीए ने देश मे बने पहले 6 सीटर विमान को रजिस्टर कर ही दिया. रजिट्रेशन के बाद विमान के परीक्षण उड़ान का रास्ता साफ हो गया है और इसके साथ ही देश मे अब स्वदेशी विमान बनाने के सपने का मार्ग भी खुल गया है. खासबात है कि इस कोशिश में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मिली मदद के लिए इस विमान का नाम VT NMD यानी विक्टर टैंगो नरेंद्र मोदी देवेंन्द्र रखा गया है. मुंबई के कांदिवली में रहने वाले कैप्टन अमोल यादव का कहना है जो काम तीन दिन में होना चाहिए था उसके लिए 6 साल लग गए क्योंकि देश मे बने विमान के रजिस्ट्रेशन का कोई नियम ही नहीं था. अब जल्द ही बाकी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद परीक्षण उड़ान की इजाजत मिलते ही उनका विमान हवा में उड़ान भरेगा.

देश में जो बड़ी बड़ी निजी और सरकारी कंपनियां नहीं कर पाईं उसे एक शख्स ने कर दिखाया. लेकिन ये आसान नहीं था, इसके लिए कैप्टन अमोल यादव को अपना एक घर बेचना पड़ा, लालफीताशाही से लड़ना पड़ा. तब जाकर उनके सपने को पंख मिला है, अब बस उड़ान भरने की देरी है.


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कैप्टन अमोल यादव ने साल 2009 में ही कांदिवली में बिल्डिंग के छत पर ही तकरीबन 4 करोड़ खर्च कर 6 सीटों वाला हवाई जहाज बनाया था. साल 2016 में मुंबई में मेक इन इंडिया के तहत उसे प्रदर्शित भी किया गया. लेकिन परीक्षण उड़ान की ईजाजत साल 2011 से लटकी पड़ी थी.

आखिरकार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निवेदन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हस्तक्षेप किया तब जाकर रजिस्ट्रेशन हो पाया. लिहाजा पायलट ने अपनी पूरी मेहनत दोनों के नाम समर्पित कर दी है. कैप्टन बताते है ये कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की कोशिश का ही नतीजा है कि उनका सपना सच होने को है. इसलिए अपने विमान को दोनों का नाम देकर उन्होंने अपनी कृतज्ञता प्रकट की है. इसके पहले कैप्टन अमोल यादव ने आरोप लगाया था कि डीजीसीए सालों तक ना सिर्फ उनके आवेदन पर बैठा रहा बल्कि पुराने नियम को भी बदल दिया था लेकिन पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद पुराना नियम फिर से बहाल हुआ.

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कैप्टन अमोल यादव की प्रतिभा का लोहा मान महाराष्ट्र सरकार ने उनकी कंपनी के साथ करार किया है और पालघर में एक जमीन भी आवंटित की है. लेकिन डीजीसीए में रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाने की वजह से सबकुछ अधर में लटका पड़ा था. इस बीच कैप्टन अमोल ने अपनी उसी छत पर अब 19 सीटर विमान बनाने का काम शुरू भी कर दिया है.



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