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सारे मंत्री जान लें, सरकार का रिमोट मेरे हाथ में है : सीएम फडणवीस

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सारे मंत्री जान लें, सरकार का रिमोट मेरे हाथ में है : सीएम फडणवीस

महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)

मुंबई:

शिवसेना और बीजेपी के बीच महाराष्ट्र में रिश्ते कभी नरम रहते हैं कभी गरम, लेकिन बालासाहेब की जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मंच से ही कह दिया कि सरकार का रिमोट उनके हाथ में है और ये सारे मंत्रियों को समझ लेना चाहिए।

सरकार ने राज्य में 5 नई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन सबके नाम में हिन्दुहृदय सम्राट शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे भी लिखा है, जिससे इन योजनाओं को लेकर सियासत गरमाने के आसार हैं।

शनिवार को मुंबई सेंट्रल में राज्य परिवहन के डिपो में बने एक मंच से 5 योजनाओं का ऐलान किया गया, जिसमें कुछ किसानों के लिए तो कुछ राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों के लिए। हिन्दूहृदय सम्राट शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे हर योजना से पहले लिखा गया फिर चाहे वो - कन्यादान योजना हो, अपघात सहायता निधि योजना, निराधार स्वाबलंबन योजना, अतिविशेषपचार रूग्णालय, या फिर मोटरवाहन अभियंत्रिकी महाविद्यालय योजना।

हर योजना में शिवसेना प्रमुख का नाम है, बावजूद इसके मंच से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का बयान इशारों इशारों में शिवसेना-बीजेपी के तल्ख रिश्तों में बॉस कौन है की बात पुख्ता करने की कोशिश लगी। फडणवीस ने कहा, 'बालासाहेब का रिमोट आपके हाथों में आया, इस सरकार को चलाने के लिए वो रिमोट आपने मेरे हाथों में दिया। मतलब बाकी मंत्रियों को भी समझ लेना चाहिए कि उद्धव जी ने रिमोट मेरे हाथों में दिया है, किसी के मन में कुछ भी हो ये शिवशाही 5 सालों तक महाराष्ट्र में बेहतरीन काम करेगी।'


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सहयोगी को साधने की इसे कोशिश से शिवसेना तो खुश है। इस मौके पर उद्धव ठाकरे ने कहा, 'आज शिवसेना प्रमुख का जन्मदिन है, सारी योजनाएं उनके नाम पर हैं। इस पर सबके पेट में दर्द हो रहा होगा, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।' लेकिन विपक्ष को लगता है कि नाम के साथ धर्म और पार्टी जोड़ना लोकतंत्र के खिलाफ है।

कांग्रेस के प्रवक्ता अनंत गाडगिल ने कहा, 'सत्ता में आने के बावजूद शिवसेना बालासाहेब का स्मारक नहीं बना पाई है ये उसकी खीझ है। हम बालासाहेब का सम्मान करते हैं, हमने भी नेहरू जी या इंदिरा जी के नाम पर योजनाएं बनाईं लेकिन उसमें कभी कांग्रेस नहीं जोड़ा, लेकिन ये लोग पार्टी, धर्म दोनों का नाम जोड़ रहे हैं ये बहुत ग़लत है।'



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