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आईआईटी बॉम्‍बे से निकला इंटरनेट अब जोड़ेगा देश के हर गांव को!

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आईआईटी बॉम्‍बे से निकला इंटरनेट अब जोड़ेगा देश के हर गांव को!

आईआईटी बॉम्‍बे (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. फिलहाल इस योजना को 25 गांवों में आज़माया जा चुका है
  2. इस प्रोजेक्ट को ब्रसेल्स में हुए इनोवेशन चैलेंज में 82 लाख का इनाम मिला
  3. दावा है कि इससे कम खर्चे में 5जी भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है
मुंबई: देश के हर गांव में बिना ऑप्टिक फाइबर के जाल के इंटरनेट पहुंचाने का सपना आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने पूरा कर दिया है. 5 सालों की मेहनत के बाद भारत के गांव ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जुड़ने का सपना देख सकते हैं. दुनिया ने इस प्रयोग को सराहा है. Mozilla इंटरनेट की एक प्रतियोगिता में 27 देशों की 100 परियोजनाओं को पछाड़ते हुए ग्राम मार्ग नाम के इस प्रोजेक्ट ने पहला स्थान जीता. आईआईटी बॉम्बे की कोशिश थी इंटरनेट के जरिये शहर से ग्राम मार्ग तक पहुंचने की, मेहनत शुरू हुई 2012 में. फैकल्‍टी अफेयर्स के डीन प्रोफेसर अभय करंदीकर ने बताया कि उन्होंने अपने अनुसंधान में पाया कि दूरदर्शन के पास टीवी व्‍हाइट स्‍पेस का स्पेक्ट्रम खाली पड़ा हुआ है, जिसका वो इस्तेमाल नहीं कर रहे. फिर स्पेक्ट्रम को इस्तेमाल करने के लिए तैयार हुआ एक छोटा सा वाईफाई उपकरण TVWS डिवाइस जिसने सपनों को पंख दे दिये.

ये डिवाइस IEEE 802.11 a/b/g/ वायरलेस बोर्ड है जो आरएफ कार्ड से जुड़ा है. ये कार्ड 2.4 GHz फ्रीक्वेंसी को TV UHF में बदल देता है, जिन्हें TV White Space से जोड़ कर, हर गांव में बेहद कम खर्च और बगैर बड़े तकनीकी तामझाम के इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. सबसे बड़ी बात इन उपकरणों को सोलर पैनल से बिजली मिलती है. इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती थी ईंधन की वजह से होने वाले ऑपरेशनल खर्चों को रोकना.

25 छात्रों की टीम दिन रात इसके लिये मेहनत कर रही थी. फिलहाल इस योजना को 25 गांवों में आज़माया जा चुका है, दावा है कि इससे कम खर्चे में 5जी भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है. इस प्रोजेक्ट से जुड़े जसप्रीत का कहना है कि वो चाहते हैं शोध से इसे और सस्ता बनाया जाए ताकि हर गांव में इंटनरेट लोगों की पहुंच में हो. वहीं परियोजना में आई दिक्कतों के बारे में मेघना ने कहा कि फ्रीक्वेंसी के बारे में जानकारी जुटाना तक मुश्किल था, जो हमने आरटीआई के ज़रिये हासिल किया. उसके बाद गांव के लोगों को समझाना भी एक चुनौती थी.

इस प्रोजेक्ट को ब्रसेल्स में हुए इनोवेशन चैलेंज में 82 लाख का इनाम मिला है. टीम इस रकम का इस परियोजना को और बेहतर बनाने में इस्तेमाल करेगी. इस परियोजना को पब्लिक प्राइवेट पंचायत पार्टनरशिप मॉडल के तहत डेवलप किया जाएगा. कोशिश है देश के 6,40,000 गांवों को इसके तहत जोड़ने की, ताकि डिजिटल इंडिया के सपने को हकीकत में बदला जा सके.


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