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'लॉकी' ने लॉक किये मंत्रालय के 150 कंप्यूटर, फिरौती मिलने के बाद ही खुलता है लॉकी का लॉक

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'लॉकी' ने लॉक किये मंत्रालय के 150 कंप्यूटर, फिरौती मिलने के बाद ही खुलता है लॉकी का लॉक

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

मुंबई: महाराष्ट्र मंत्रालय के तक़रीबन 150 कंप्यूटर लॉक हो चुके हैं। यानी उन कंप्यूटरों में दर्ज फ़ाइलों को खोला या पढ़ा नहीं जा सकता है। जानकारों की मानें तो ये एक वायरस अटैक है जिसके जरिये कंप्यूटर की फ़ाइल लॉक कर फिरौती वसूली जाती है, इसलिए इसका नाम ही लॉकी रैनसमवेयर है।

लॉकी रैनसमवेयर की वजह से पिछले 10 दिनों से 150 कंप्यूटरों की फाइलें एन्क्रिप्ट हो चुकी हैं। डाटा पढ़ा नहीं जा सक रहा है। हालांकि गृहराज्य मंत्री राम शिंदे का कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं। सारे डाटा का बैकअप सुरक्षित है।

साइबर क्राइम की भाषा में इसे लॉकी रैनसमवेयर अटैक कहते हैं। ये एक खतरनाक कंप्यूटर वायरस है जो कंप्यूटर को लॉक कर देता है और यूज़र से उनकी फ़ाइलों की रिकवरी के लिए पैसे की मांग करता है।

सायबर एक्सपर्ट राहुल अयप्पन के अनुसार ज़्यादातर कंप्यूटर वायरसों की तरह रैनसमवेयर भी अक्सर फ़र्ज़ी ईमेल, स्पैम या फ़र्ज़ी सॉफ़्टवेयर अपडेट के रूप में आता है। जिसे यह मिलता है वह इसके लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करता है तो वायरस यूज़र की फ़ाइलों को एनक्रिप्ट करना शुरू कर देता है।

साधारण भाषा में हम इसे फिरौती के लिए किसी को बंधक बनाना कह सकते हैं और जिस तरह फिरौती की रकम देने के बाद भी बंधक के जिन्दा वापस मिलने की कोई गारंटी नहीं होती वैसे ही इसमें भी बिट कॉइन के जरिये पैसे देने के बाद भी फाइलें अनलॉक होने की कोई गारंटी नहीं।
 
बिट कॉइन यानी कि इंटरनेशनल डिजिटल वॉलेट, जिसके जरिये विश्व में कहीं भी ऑनलाइन व्यवहार किया जा सकता है। मतलब आप कुछ भी खरीद-बेच सकते हैं और बैंकों से भी व्यवहार कर सकते हैं।

भारत में एक बिट कॉइन की कीमत 30 से 32 हजार रुपये है। हैकर या उस तरह के लोग इस तरह के कामों के लिए बिट कॉइन का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनकी पहचान छिपी रहे।


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