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महाराष्ट्र में पार्षदों की आमदनी 150 फीसदी बढ़ी

महाराष्ट्र में महानगरपालिकाओं का श्रेणीबद्ध वर्गीकरण किया गया है जिसके तहत मेहनताना 10 हजार रुपये से 25 हजार रुपये निश्चित किया गया है.

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महाराष्ट्र में पार्षदों की आमदनी 150 फीसदी बढ़ी

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

मुंबई: महाराष्ट्र की 27 महानगरपालिकाओं के पार्षदों के मेहनताने में वृद्धि की गई है. वृद्धि फीसद में 150% दिख रही है. पिछले 5 साल से वेतन बढ़ोतरी की मांग लंबित थी. हालांकि, साथ में यह जानना भी रोचक होगा कि आखिर पार्षदों को कितना मेहनताना मिलता था? राज्य में सर्वाधिक मेहनताना मुम्बई महानगरपालिका के पार्षदों को मिलता था जो कि था महज 10 हजार रुपये प्रतिमाह. सन 2010 में इसे बढ़ाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था जिसके तहत अब मुम्बई के पार्षदों का मेहनताना प्रतिमाह 25 हजार रुपये होगा. बाकी महानगरपालिकाओं में भी बढ़ोतरी देखने मिलेगी. लेकिन वह BMC के पार्षदों से कम होगी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अधीन शहरी विकास विभाग ने शनिवार को जारी किए आदेश में यह घोषणा की है.

महाराष्ट्र में महानगरपालिकाओं का श्रेणीबद्ध वर्गीकरण किया गया है जिसके तहत मेहनताना 10 हजार रुपये से 25 हजार रुपये निश्चित किया गया है. मौजूदा स्थिति में BMC के पार्षदों के लिए मेहनताने के साथ सालाना 60 लाख रुपये अपने क्षेत्र विकास के लिए आवंटित किए गए हैं. जबकि विभाग विकास के लिए पार्षदों के समूह को सालाना 1 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं. इसी के साथ पार्षदों को मोबाइल सिम कार्ड और हैंडसेट फ्री मिलता है और हर माह उनके मोबाइल का 1200 रुपये का बिल BMC चुकाती है. शहर परिवहन की बसों में पार्षदों की यात्रा मुफ्त है और मुम्बई के प्रसिद्ध बांद्रा - वर्ली सी लिंक पर उनकी आवाजाही टोल फ्री है.

वैसे पार्षदों की ताज़ा मांग है कि उनका मेहनताना बढ़ाकर हर माह 50 हजार रुपये किया जाए और मीटिंग अलाउंस के नाम पर हर बार 500 रुपये दिए जाए. समाजवादी पार्टी के BMC में नेता रईस शेख ने इस मांग को प्रमुखता से रखते हुए कहा है कि परिसीमन के बाद वार्ड क्षेत्र बढ़ गया है. ऐसे में लोगों की समस्या सुलझाने के लिए काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है. ऐसे में पार्षद के पास आमदनी का कोई और जरिया नहीं होता. जिस वजह से उसे एक सम्मानजनक मेहनताना मिलना चाहिए.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हालिया सरकार के दौरान विधायकों का मेहनताना हर माह 75 हजार रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये किया गया था. जबकि पूर्व विधायकों का पेंशन प्रतिमाह 40 हजार रुपये किया गया है.


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