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मुंबई : तड़के साढ़े तीन बजे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने देखी "मेट्रो की रफ्तार"!

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मुंबई : तड़के साढ़े तीन बजे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने देखी

महाराष्‍ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस...

खास बातें

  1. रोज़ाना 75 लाख मुसाफिरों के बोझ तले लोकल दम तोड़ रही है.
  2. सड़क पर बसों के चलने लायक जगह नहीं बची
  3. कंक्रीट के इस जंगल में मेट्रो से बहुत उम्मीदे हैं.
मुंबई: मुंबई में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, बुधवार अलसुबह साढ़े 3 बजे अचानक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का काफिला रूका. चंद मिनट के अंदर मेट्रो 7 का पहला गर्डर खंभों के ऊपर चढ़ गया. हालांकि इस काम के लिए पहले से ट्रैफिक की टीस झेल रहे मुंबईकरों का इंतज़ार पांच घंटे और लंबा हो गया.

मुंबई मेट्रो के पहले फेज़ ने देर-सवेर रफ्तार पकड़ी, लेकिन दूसरे चरण में रफ्तार दिखने लगी है. रोज़ाना 75 लाख मुसाफिरों के बोझ तले लोकल ट्रेन दम तोड़ रही है. सड़क पर बसों के चलने लायक जगह नहीं बची.. ऐसे में कंक्रीट के इस जंगल में मेट्रो से बहुत उम्मीदे हैं.
 
devendra fadanvis

इस मौके पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा "हम प्रीकास्ट तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां ज्यादातर पार्ट्स शहर में कहीं और बनते हैं, जिन्हें यहां जोड़ा जा रहा है. इससे तेज़ी से मेट्रो के निर्माण में मदद मिल रही है. यहां शायद देश में सबसे तेज़ी से मेट्रो को निर्माण हो रहा है. ट्रैफिक से लोगों को तकलीफ हो रही है, लेकिन बड़ी बात है कि वो शिकायत नहीं कर रहे. उन्हें भी पता है ये बेहतर कल के लिए है".
 
16.5 किलोमीटर लंबे मेट्रो 7 में 14 स्टेशन होगें, जिससे मुंबई में पश्चिमी से पूर्वी हिस्से को जोड़ने में मदद मिलेगी. वहीं, इसी सुबह शहर के दूसरे छोर पर शिवसेना युवा ईकाई के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे मॉनसून से पहले तैयारियों का जायजा लेने निकले. बीमएसी की सत्ता पर सालों से काबिज शिवसेना सड़क निर्माण में घोटाले के आरोप झेलती रही है. ऐसे में मेट्रो से विस्थापितों का मुद्दा उठाकर वो रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक खेलना चाहती है. शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मेट्रो पर सवाल उठाते हुए कहा "हम जानना चाहते हैं मेट्रो से विस्थापितों को सरकार कहां बसाएगी, लगभग 1100 इमारतों को मेट्रो के लिए ज़मींदोज़ किया जाएगा."

कई वजहों से मुंबई को मेट्रो के पहले फेज की सौगात सालों देरी से मिली. खर्च भी दोगुना हुआ. मेट्रो फेज 7 सरकार 2019 तक पूरा करना चाहती है, ताकी खजाने पर देरी का बोझ ना बढ़े और लोगों की परेशानी कम हो.
 
devendra fadanvis

ऊंची-ऊंची इमारतें कुछ महीनों में खड़ी हो जाती हैं, लेकिन शहर को रफ्तार देने वाली सुविधाओं को बनने में सालों लग जाते हैं. 90 लाख लोगों के सफर को आसान बनाने 40,000 करोड़ तक का खर्च आ सकता है. देरी हुई तो पहले से ही 4 लाख करोड़ रुपये के कर्जे में डूबी महाराष्ट्र सरकार की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी.


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