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महाराष्ट्र में अरहर की दाल खरीदने में सरकार असफल, किसानों के पसीने छूटे

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महाराष्ट्र में अरहर की दाल खरीदने में सरकार असफल, किसानों के पसीने छूटे

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि 22 अप्रैल तक सरकार के पास रजिस्टर कराई हुई सारी अरहर की दाल खरीदी जाएगी. (फाइल फोटो)

मुंबई: देश में सर्वाधिक अरहर की पैदावार करने वाले महाराष्ट्र के किसानों को अपना उत्पाद बेचने के लिए पसीने छूट रहे हैं. महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार का दाल खरीद प्रबंधन फेल होने से किसान परेशान हैं.

अरहर की बंपर फसल खरीदने के लिए महाराष्ट्र सरकार का नियोजन गड़बड़ा गया है. पिछले साल के 25 लाख 60 हजार टन के मुकाबले इस साल देश में 42 लाख 30 हजार टन अरहर का उत्पादन हुआ है, जिसमें से अकेले महाराष्ट्र के किसानों ने 20 लाख टन से ज्यादा अरहर दाल पैदा की है. लेकिन, यह पैदावार अब बिक नहीं रही. महाराष्ट्र सरकार ने पैदावार में से केवल 20% दाल खरीद ली है और बाकी दाल नाफेड से खरीदने का दबाव बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाने की कोशिश कर रही है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय में बात करते हुए कहा कि 22 अप्रैल तक सरकार के पास रजिस्टर कराई हुई सारी अरहर की दाल खरीदी जाएगी. इस दौरान हम खास ध्यान रखेंगे की कहीं यह दाल व्यापारी तो सरकार को नहीं बेच रहे? ऐसा पाए जाने पर उन व्यापारियों पर क्रिमिनल मामले दर्ज होंगे.

सरकार को डर है कि किसान से कम दाम पर अरहर खरीदकर उससे ज्यादा कीमत पर सरकार को दाल बेचकर मुनाफा व्यापारी न लूट ले जाएं.

राज्य में चले सूखे की वजह से किसान ने अच्छे दाम के आकर्षण में दाल की तरफ रुख किया है. ऐसे में सरकार को बंपर फसल का अंदाजा साल के शुरुआत में ही हो जाना चाहिए था. लेकिन, फडणवीस सरकार के कृषि और सहकारिता विभाग बुरी तरह विफल हुए दिख रहे हैं. फ़सल जब बिकने आ गई, तब सरकार के ये विभाग हाथ-पांव मारते दिख रहे हैं, जिससे किसान सर्वाधिक परेशान हैं.

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा है कि मौजूदा स्थिति में सरकार ने अपनी लचर भूमिका की वजह से अरहर पैदा कर चुके किसानों को काफ़ी वित्तीय नुकसान कराया है. ऐसे में यह कहीं आत्महत्या के लिए एक और कारण न बन जाए.

महाराष्ट्र सरकार का दावा है कि प्रति क्विंटल 5,050 रुपेय का दाम देकर वह किसान के साथ इंसाफ कर रही है. गौरतलब है कि महाराष्ट्र के बगल के कर्नाटक में अरहर की खरीद पूरी भी हो गई और महाराष्ट्र सरकार अब भी इसके प्रबंधन में लगी है.


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